खसरे का टीका लगने से वंचित बच्चों को तलाशेगा विभाग
पहला और दूसरा टीका नहीं लगवाने वाले बच्चों को लगाया जाएगा टीका
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। खसरा और रूबेला बीमारी से बचाने के लिए विभाग अब टीका लगवाने से वंचित चल रहे बच्चों की खोज करेगा। इसके लिए विभाग ने अभियान चलाने की योजना बनाई है। अभियान के तहत मिजिल्स-रूबेला का पहला व दूसरा टीका लगवाने से वंचित चल रहे बच्चों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें अभियान के तहत टीका लगाया जाएगा। जिससे खसरे की बीमारी से बचाया जा सके।
प्रदेश में खसरे के मामले सामने आने लगे है। इसको लेकर जिले के स्वास्थ्य अधिकारी अलर्ट हो गए है और अब ऐसे बच्चों को चिन्हित करने की योजना बनाई है। जिन्होंने मिजिल्स-रूबेला का टीका नहीं लगवाया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि खसरा एक जानलेवा बीमारी है। यह एक संक्रामक रोग है और एक प्रभावित व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे में फैल जाती है। खसरे से पीड़ित बच्चों को निमोनिया, दस्त और दिमागी संक्रमण हो सकता है। इससे बचाव के लिए पहला टीका नौ माह तक के बच्चों को और दूसरा टीका 16 माह से 24 माह तक के बच्चों को लगाया जाता है। दो वर्ष से अधिक दूसरी खुराक से छूटे बच्चों को पांच वर्ष तक की उम्र में टीका लगाया जा सकता है। जिले में करीब 10 फीसदी बच्चे टीकाकरण से वंचित चल रहे हैं। ऐसे बच्चों को ढूंढकर पहला और दूसरा टीका लगाया जाएगा।
ये है खसरे के लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार तेज बुखार के साथ त्वचा पर लाल दाने व चकत्ते, खांसी, बहती नाक और लाल आंखें होना आदि खसरे के लक्षण है। रूबेला वायरस के कारण बच्चे कई तरह की शारीरिक विसंगतियों का शिकार हो जाते है जैसे अंधापन, बहरापन, जन्मजात दिल की बीमारियां होना आदि शामिल है।
खसरा-रूबेला के टीकाकरण से वंचित चल रहे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें टीका लगाया जाएगा। जिससे बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सके। इसके लिए जल्द ही सर्वे शुरू होगा। इसके बाद चिन्हित बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। - डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, सीएमओ