फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Firozabad News: 20 साल में जन्मतिथि, 18 साल बाद सही हो सका मार्कशीट पर पिता का नाम

Fri, 29 Sep 2023 11:25 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। शहर में रहने वाले सचिन ने अनुक्रमांक संख्या 0081686 वर्ष 2002 हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। परीक्षा का परिणाम आने के बाद उनके अंकपत्र में जन्मतिथि गलत हो गई थी। इसी तरह 2004 में धर्मेंद्र कुमार की मार्कशीट में पिता के नाम की स्पेलिंग गलत हो गई थी। इसको ठीक कराने के लिए उन्होंने प्रयास भी किया, लेकिन उपयुक्त दस्तावेज समय से नहीं मिलने और बार-बार बोर्ड का चक्कर लगाते हुए आखिरकार वह थक हार कर बैठ गए। सचिन की मार्कशीट में 20 साल बाद जन्मतिथि में सुधार हुआ, जबकि धर्मेंद्र को 18 साल बाद असली वल्दियत की पहचान मिली। हालांकि जब अंकतालिका में सुधार हुआ है, तब तक नौकरी की उम्र निकल गई है।यूपी बोर्ड की तरफ से जून और जुलाई में ऐसे मामलों को सही करने के लिए कैंप लगाए गए थे। इसमें लंबे समय से इस प्रकार के अटके बैकलाॅग को ठीक करने के लिए दो बार शिविर लगाकर जिलों में इस प्रकार की त्रुटियों को ठीक कराया गया। इसमें 180 अभ्यर्थियों की अंकतालिकाएं सुधार होकर आ गई हैं। 2002 या उसके हाईस्कूल उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों की अंकतालिकाएं अब ठीक होकर आई हैं। सबसे अधिक मामले वर्ष 2010 से 2017 के बीच के रहे। डीआईओएस निशा अस्थाना ने बताया कि परीक्षार्थियों के हितों को देखते हुए यूपी बोर्ड की तरफ से विशेष शिविर लगाकर इस प्रकार के मामले ठीक कराए गए। इसके साथ ही बोर्ड की वेबसाइट पर भी संशोधित अंकपत्र/प्रमाणपत्र उपलब्ध है। अभी भी 25 से ज्यादा मामले लंबित हैं। क्योंकि इनके स्कूलों से पत्रावलियां अपूर्ण दी गईं थी। इन कॉलेजों से पत्रावलियां की मांग की जा रही है।
विज्ञापन



ऑनलाइन ठीक करा सकेंगे अब अशुद्धि
यूपी बोर्ड की तरफ से अंकपत्र व प्रमाणपत्र में नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्मतिथि में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए बोर्ड की तरफ से ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करने की तैयारी हो गई है। जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को क्षेत्रीय कार्यालय और बोर्ड ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बोर्ड की वेबसाइट पर दिए लिंक के जरिए आवेदन करके त्रुटियों में सुधार कराया जा सकेगा।



केस नंबर एक
नरेंद्र सिंह ने 2004 में हाईस्कूल किया। इसमें पिता के नाम गलत प्रकाशित हो गया था। इसे ठीक कराने के लिए मेरठ के कई चक्कर लगाए। जब अंकतालिका ठीक नहीं हुई, वह नौकरी की उम्मीद छोड़कर चूड़ी का कार्य करने लगे।
विज्ञापन



केस नंबर दो
-विजय श्रीवास्तव ने भी 2004 में हाईस्कूल की है। उन्होंने अच्छे अंकों से परीक्षा पास की है। परीक्षा में अच्छे अंक थे, लेकिन अंकतालिका में पिता का नाम गलत था। अन्य अभिलेखों और मार्कशीट में नाम गलत होने के कारण सरकारी नौकरी के लिए फार्म भरे, हर बार फार्म निरस्त हो गए। चार साल तक बोर्ड में चक्कर काटे, अब अंकतालिका ठीक हुई है। जब नौकरी की उम्र निकल गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें