थाना अंतर्गत गांव शेखनपुर में ग्रामीण की पीटपीट कर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को नीम के पेड़ पर लटका दिया और मौके से भाग गए। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कई घंटे तक शव नहीं उठने दिया। पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर एक आरोपी को नामजद करते हुए मृतक की पत्नी को हिरासत में लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने शव का उठने दिया। मुकदमे में नामजद आरोपी के मृतक की पत्नी से विवाहेत्तर हैं।
गांव शेखनपुर निवासी श्यामवीर सिंह (43) पुत्र रामचंद्र तड़के करीब चार बजे गांव के ही सतीश के खेत में खड़ी गेहूं की फसल काटने गया था। सुबह छह बजे श्यामवीर का शव पेड़ पर लटका होेने की सूचना मिलने पर परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंच गए। शव और घटनास्थल को देख लोगों में आक्रोश फैल गया। श्यामवीर के शरीर पर चोटों के निशान थे और उसके मुंह से खून निकल रहा था। घटनास्थल पर चप्पल पड़ी थी तो वहीं शव को खींचने के निशान भी थे। अनुमान लगाया गया कि श्यामवीर को आरोपियों के पहले बेरहमी से पीटा है और शव को खींच कर पेड़ से लटका दिया। घटना के ग्रामीणाें और मृतक के परिवारीजनों में आक्रोश फैल गया। इधर, सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पेड़ से उतारने का प्रयास किया, तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। ग्रामीणों ने मांग की कि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक शव नहीं उठने दिया जाएगा। इसके चलते करीब चार घंटे तक शव मौके पर पड़ा रहा। सूचना पर एसपी देहात विकास वैद्य के साथ सीओ जसराना भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मृतक की पत्नी से भी पूछताछ की। वहीं थानाध्यक्ष को निर्देश दिए कि वह फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने मृतक की पत्नी रामादेवी को हिरासत में लेकर मृतक के भाई प्रमोद की तहरीर पर गांव के ही कल्लू उर्फ फिरोज को नामजद करते हुए एक अन्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोेस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पापा की गैर मौजूदगी में घर आता था कल्लू
चाचा और ताऊ के साथ पिता के शव को लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे श्यामवीर के बड़े बेटे सुनील का रो-रोकर बुरा हाल था। उसने बताया कि पापा के घर न होने पर कल्लू मम्मी से मिलने घर आता था। श्यामवीर तीन भाइयों में बीच का था। सबसे बड़ा भाई प्रमोद अपने छोटे भाई उपेंद्र के साथ श्यामवीर के घर से करीब आधा किलो मीटर दूर रहता था। श्यामवीर की जमीन जेड़ाझाल परियोजना में चली गई थी। मुआवजा राशि मिलने पर श्यामवीर ने कई प्लाट खरीदकर पत्नी के नाम कर दिए थे और श्याम के पास कुछ नहीं था। वह मजदूरी कर अपने तीन पुत्र सुनील, रविंद्र और सुरेंद्र का भरण पोषण करता था।