- 25 मई 2014 को जैन नगर के समीप की गोली मारकर कर दी विनय यादव की हत्या
- सात लोगों को नामजद करते हुए दो अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखा गया था मुकदमा
- जांच में बढ़ाए थे पुलिस ने दो नाम, सुनवाई के दौरान दो आरोप न्यायालय से बरी
बहुचर्चित सपा नेता विनय यादव की हत्या के मामले में न्यायालय ने गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया। अपर जिला जज संजीव कुमार सिंह ने नौ आरोपियाें को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अर्थदंड लगाया। दो आरोपियों को साक्ष्य और गवाहों के अभाव में बरी कर दिया गया।
बताते चलें उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला जैन नगर निवासी विनय यादव (तब सपा मजदूर सभा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य) की 25 मई 2014 को घर के समीप सुबह करीब सात बजे गोली मार कर हत्या कर दी थी। इसके विरोध में लोगों ने हाइवे जाम कर दिया था। हत्या के लिए पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए भीड़ ने पुलिस से मारपीट कर वाहनों को भी तोड़ दिया था। यहां बता दें 19 अगस्त 2008 को बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह सिंह, उनके भाई पूर्व सभासद निहाल सिंह और एक अन्य आरोपी ने मथुरा निवासी भोला उर्फ भोजराज की सदर तहसील के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी थी, विनय गोली लगने से घायल हुआ था। इस मामले में विनय गवाह था और उसके बहनोई चंद्रपाल वादी थे। भोला की हत्या के मामले में विनय मजबूत पैरवी कर रहे थे। इस कारण फतेह की विनय से रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में विनय यादव की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मृतक विनय यादव की भाभी शोभा यादव पत्नी विनोद यादव की तहरीर पर बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह सिंह, पूर्व सभासद निहाल सिंह, मिन्ना उर्फ मिंटा, नैहना, विमलेश जैन, मुकेश और स्वतंत्र गुप्ता व दो अन्य अज्ञातों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान मधुआ उर्फ मधुकर, राजा, सत्यपाल और रामू के नाम भी प्रकाश में आए। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्टशीट दाखिल कर दी। उधर मुकदमे की पैरवी करते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार चंचल ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य और गवाह पेश किए। साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अपर जिला जज संजीव कुमार सिंह ने फतेह सिंह, निहाल सिंह, मिन्ना उर्फ मिंटा, नैहना, विमलेश, मुकेश, स्वतंत्र गुप्ता, मधुआ उर्फ मधुर व राजा को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व तीस-तीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। कोर्ट ने सत्यपाल और रामू को साक्ष्य और गवाहों के अभाव में न्यायालय ने बरी कर दिया। आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में न्यायालय से जेल भेजा गया।