फिरोजाबाद। सर्दी के मौसम की मंगलवार को सुहागनगरी में पहली बारिश हुई। बारिश के कारण सर्दी में इजाफा हो गया। वहीं नई आबादी वाले इलाकों में फिसलन बढ़ गई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार फिरोजाबाद में करीब आठ एमएम बारिश दर्ज की गई। मंगलवार तड़के आसमान में छाई काली घटाएं बरसना प्रारंभ हो गई। तेज हवा एवं गरज के साथ आधा घंटे की बारिश सर्दी को बढ़ा गई। बारिश एवं मार्ग में पानी भरने के कारण सुबह घरों से बाहर टहलने वालों के कदम थम गए। इसके कारण शहर के पार्कों में सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। बारिश के कारण सबसे अधिक दिक्कत नई आबादी वाले इलाकों के लोगों को हुई। बघेल काॅलोनी, आंबेडकर नगर, कमला नगर, बसंत बिहार काॅलोनी, रानी नगर, छपरिया, बगदाद नगर आदि क्षेत्र के नागरिकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। बारिश के कारण फिसलन बढ़ गई थी। इस कारण आवागमन में भी दिक्कत का सामना करना पड़ा। जिला कृषि अधिकारी सुमित कुमार चौहान ने बताया कि मंगलवार को जिले में औसतन आठ मिलीमीलर बारिश हुई है।
बुजुर्गों ने नहीं छोड़ी रजाई
बारिश एवं सर्दी के कारण घरों में बुगुर्गों ने रजाई नहीं छोड़ी। क्योंकि बारिश होने के साथ गलन बढ़ गई थी। इसके कारण घरों में दिन में अलाव जलाकर तापते दिखाई दिए, जिससे सर्दी से बचाव किया जा सके।
आलू उत्पादक किसान चिंतित, नमी बढ़ी तो चुर्री रोग लगने की संभावना
शीतलहर और बारिश ने आलू उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी। पिछले एक सप्ताह से लगातार घने कोहरा और गलन के साथ मंगलवार को हुई बारिश के कारण आलू की फसल सीधे प्रभावित होगी। मिट्टी गीली हो जाने के कारण आलू की खुदाई नहीं होने से बाजार में आलू की आवक घट जाएगी। मंगलवार को ही थोक मंडी में अन्य दिनों के सापेक्ष आलू काफी कम पहुंचा। इसके कारण आलू की कीमत में एक रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी हो गई। किसान हरेंद्र सिंह निवासी रामकुंआ ने बताया कि अभी आलू तीन माह का हुआ है ऐसे में रोग आया तो आलू का साइज छोटा रह जाएगा। वहीं नगला भूपाल निवासी विनय यादव ने बताया कि अभी तक उनकी फसल ठीक है लेकिन सर्दी बढ़ने से यदि पाला पड़ा तो आलू का पेड़ जल जाएगा और फिर आलू की पैदावार कम हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक सुभाषचंद्र शर्मा ने बताया कि जिस प्रकार आलू की फसल में लगातार नमी चल रही थी और बारिश होने के कारण अब चुर्री रोग लगने की संभावना बढ़ गई है। चुर्री रोग लगने से आलू की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। यदि मौसम साफ होगा तभी किसानों को राहत मिलेगी।