बुखार-जुकाम,खांसी के काढ़े के साथ ह्यूमिनिटी बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ गई डिमांड कोरोना संक्रमण के बढ़ने के साथ बाजार में आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ी है डिमांड,तुलसीरस एवं अश्वगंधा के चूर्ण की बिक्री बढ़ी फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण के दौरान आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री खूब हुई। बुखार,खांसी-जुकाम के काढ़े के साथ ह्यूमिनिटी बढ़ाने के लिए विभिन्न काढ़ों की खरीददारीकरने के लिए लोग आयुर्वेदिक दुकानो ंपर पहुंचे। सबसे अधिक अश्वगंधा एवं च्वनप्राश,तुलसीरस की बिक्री होती रही। कई बार तो ग्राहकों को बैरंग तक लौटना पड़ा। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही लॉकडाउन के दौरान बाजार में आयुर्वेद की दवाओं की बिक्री सबसे अधिक बढ़ी। अंग्रेजी दवाओं में विटामिन-सी की गोलियों की बिक्री खूब हुई। वहीं आयुर्वेद के रूप में बाजार में बुखार का काढ़ा के साथ सर्दी-जुकाम का काढ़ा की खरीददारी करते लोग दिखाई दिए। दुकानदार का कहना था लॉकडाउन के दौरान काढ़ा पूरी तरह से समाप्त हो गया था। पतंजलि सेंटरों पर इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। बुखार के लिए गिलोय 170 रुपया में,ह्यूमिनिटी बढ़ाने के लिए तुलसीरस दो सौ रुपया,गिलोय का चूरन 65 तथा अश्वगंधा चूरन 120 रुपया के साथ च्वनप्राश 350 रुपया तक का मिल रहा है। अधिकांश लोग घरों के लिए आयुर्वेदिक दुकानों से इनकी खरीददारी कर रहे हैं। इसके कारण बाजार में इनकी डिमांड काफी तेजी से बढ़ी है। -आयुर्वेद की दुकान संचालित करने वाले अनिकेत वर्मा उर्फ गोपी ने कहा कि लॉकडाउन के बीच काढ़ा की सबसे अधिक डिमांड रही। अब ह्यूमिनिटी बढ़ाने के चूरन एवं तुलस ीरस की बिक्री हो रही है।