फिरोजाबाद। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलीय क्षेत्रों में मृदा की उत्पादन क्षमता बढाने हेतु जरूरी उपाय करने पर जोर दिया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसान मृदा की उर्वरकता बढाने हेतु मई व जून माह में ढेंचा की बुवाई की सलाह दी है। वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र डॉ तेजप्रकाश के अनुसार जिले के विभिन्न ब्लाकों में कृषि भूमि की उर्वरक क्षमता को बढाए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए हरी खाद सर्वोत्तम उपाय है। उन्होंने बताया कि कृषि भूमि की उर्वरकता बढाने हेतु यह उपयुक्त समय है। किसान भाई हरी खाद के रूप में दलहनी फसल अथवा विभिन्न किस्म की पंजाबी ढेंचा,पंत ढेंचा,नरेद्र ढेंचा अथवा सीएसडी-13 को प्रति हैक्टैयर करीब 50 से 60किलोग्राम की बुवाई करें। उन्होंने बताया कि ढेंचा व अन्य दलहनी फसलों में कैल्सियम की मात्रा अधिक होने के कारण यह बहुत जल्दी सड जाता है। इससे क्ष्रारीय व लवणीय दोनों प्रकार की फसलों की उर्वरकता काफी बढ जाती है।कृषि वैज्ञानिक डॉ ओमकार यादव ने बताया कि ढेंचा फसल बुवाई हेतु मई व 15 जून तक का समय सर्वोत्तम होता है।