फिरोजाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत चयनित किए गए छात्र-छात्राओं को निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों में प्रवेश के लिए शासन ने अनुमति दे दी। लेकिन जिले में अभिभावकों को आवंटित निजी स्कूल भी पसंद नहीं आया है। स्थिति यह है कि 777 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश नहीं लिया है। तीनों लॉटरी में चयनित 2193 छात्र-छात्राएं निजी स्कूलों में प्रवेश ले चुके हैं, जबकि चौथी लौटरी की प्रवेश प्रक्रिया जारी है।निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्री-नर्सरी और कक्षा एक में सीट के सापेक्ष 25 फीसदी मुफ्त दाखिला कमजोर आय वर्ग के बच्चों को मिलता है। इसका लाभ लेने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। आवेदन मिलने के बाद लॉटरी के माध्यम से छात्र-छात्राओं का चयन प्रवेश के लिए किया जाता है। अभिभावक किस विद्यालय में एडमिशन कराना चाहते हैं, उनसे उस क्षेत्र के तीन विद्यालयों के विकल्प भरवाए जाते हैं। शासन से रिक्त सीटों वालें और मानक के अनुसार स्कूल का आवंटन होता है। लेकिन, अभिभावकों ने गरीबी दिखाकर शहर के प्रमुख कांवेंट स्कूल में एडमिशन मांगा था। प्रमुख स्कूल आवंटित न होकर बच्चों को उसी क्षेत्र का निजी स्कूल आंवटित हो गया। ऐसे ने कई अभिभावकों ने बच्चों को उन स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाया है।
जिले की बात करें तो यहां पर तीन बार आवेदन प्राप्त किए और उसके बाद लाॅटरी के माध्यम से 2970 छात्र-छात्राओं का चयन निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए किया गया। इनमें से अभी तक मात्र 2193 छात्र-छात्राओं के ही प्रवेश हो सके हैं। जबकि 777 ऐसे छात्र-छात्रा हैं, जिनके प्रवेश नहीं हो सके। संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों का कहना है कि हो सकता है कि इन छात्र-छात्राओं को मनपसंद स्कूल न मिले हो। ऐसे में उन्होंने प्रवेश नहीं दिलाया है।
इस तरह हुआ था छात्र-छात्राओं का प्रवेश
लॉटरी - चयनित छात्र-छात्रा - प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्रा - प्रवेश से वंचित छात्र-छात्रा
पहली लॉटरी - 820 - 591 - 229
दूसरी लॉटरी - 1222 - 880 - 342
तीसरी लॉटरी - 928- 722 - 206
आरटीई के तहत चयनित छात्र-छात्राओं के प्रवेश की जानकारी संबंधित निजी स्कूलों से प्राप्त की जा रही है। पता किया जा रहा है वंचित छात्र-छात्राओं के किन कारणों से प्रवेश नहीं लिए हैं। प्रवेश को लेकर कोई शिकायत वेटिंग में नहीं हैं। सभी को प्रवेश दिलाए जाएंगे। यदि कोई स्कूल संचालक किसी छात्र का प्रवेश नहीं ले रहा है या परेशान कर रहा है। उसकी शिकायत हमें करें।
आशीष पांडेय, बीएसए