हुसैनगंज(फतेहपुर)। क्षेत्र के एक गांव की चचेरी बहनों से सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने सन् 1992 की सनसनीखेज वारदात की याद दिला दी है। लोग बोले कि ऐसे अपराधियों का एनकाउंटर होना चाहिए। इस घटना के आरोपियों को पुलिस ने बांग्लादेशी होना बताया था। अब तक उस घटना से स्थानीय पुलिस अनभिज्ञ बनी है।
हुसैनगंज थाना क्षेत्र के ही एक गांव में एक युवती (20) और दूसरी किशोरी (13) के साथ दरिंदगी की घटना 1992 में हुई थी। घटना दोपहर के समय जंगल में हुई थी। गांव में घुमंतू का डेरा था। डेरे के रहने वाले कमरुद्दीन, नासिर और जमील ने दोनों को अकेला देखा तो नीयत खराब हो गई। तीनों ने युवती और किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म के बाद दोनों को बेहोशी हालत में छोड़कर चले गए थे।
होश आने के आधे घंटे बाद युवती घर पहुंची और परिजनों को आपबीती बताई थी। इसके बाद परिवार के लोगों ने किशोरी की तलाश की तो किशोरी को बदहवास हालत में मिली। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान किशोरी न दम तोड़ दिया था। तब तत्कालीन मंत्री ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उन्होंने बचने वाली युवती की शादी का सारा जिम्मा उठाने की बात कही थी।
स्थानीय मामले के पैरोकार जितेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि पीड़ित परिवारों की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। उन्होंने पैरवी में मदद की। जिला कोर्ट ने करीब डेढ़ साल बाद ही तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। फांसी की तारीख तय होनी थी। फांसी घोषित होने के बाद तीनों को प्रयागराज नैनी जेल भेजा गया था। प्रयागराज से दोषी जिला कोर्ट पेशी पर आए थे। पुलिस कर्मियों को धक्का देकर यहां से तीनों आरोपी भाग निकले थे। पुलिस इनका अब तक पता नहीं लगा सकी। पुलिस ने डेरे वालों को बांग्लादेशी होना बताया था। प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि पुराने मामले की जानकारी है, जांच कराई जाएगी।