फोटो संख्या 3- - दिल्ली से लौट रहे बिहारी मजदूरों ने बयां किया अपना अपना दर्द
संवाद न्यूज़ एजेंसी फतेहपुर। वैश्विक महामारी की चपेट में अपरोक्ष रूप से बिहारी मजदूर ज्यादा प्रभावित हुए हैं। राह चलते बिहारियों का दर्द सुनते बन रहा है। ठेला रिक्शा के जरिए दिल्ली से बिहार के लिए लौट रहे कामगार मजदूरों ने जो कुछ कहा वह इनकी बेबसी बयां करने वाला रहा । एक बिहारी ने बताया कि परिवार के लोगों को ट्रक से भेजा गया है। ट्रक वालों ने छोटे बच्चों का भी किराया पूरा ले लिया । नउवा बाग बाईपास पर पैर वाला रिक्शा खींचकर बिहार लौट रहे एक जत्थे से अमर उजाला प्रतिनिधि का सामना हुआ । हाथ देने पर पहले यह सहमे। फिर दबी जुबान जो कुछ भी बयां किया वह मानवता को शर्मसार करने वाला रहा । नालंदा में रहने वाले अरुण कुमार ने बताया कि वह सभी 12 तारीख को दिल्ली से चले थे । खाने पीने का जो सामान साथ लाए थे वह दूसरे दिन ही खत्म हो गया। ऐसे में उन्हें दूसरों का चेहरा ताकना पड़ रहा है। नालंदा के ही रहने वाले सिधारी ने बताया कि परिवार के लोगों को ट्रक से घर भेजा गया है । यह सभी सकुशल घर पहुंच गए हैं । ट्रक वाले ने एक सवारी का ₹4000 वसूला है । भागलपुर के रहने वाले संजय जाधव ने बताया कि ट्रक वालों ने मन माया मनमाना पैसा वसूला है । जिन्होंने 10 साल की बच्ची और बच्चों का भी पूरा किराया 4000 रुपये प्रति व्यक्ति ले लिया। कटिहार के रहने वाले पप्पू मंडल ने बताया कि रास्ते भर डर बना रहता है कि कहीं रोक न लिए जाएं। इसने कहा कि साहब अब पैर से रिक्शा खींचा नहीं जा रहा है लेकिन इसके सिवाय दूसरा चारा भी नहीं है । इन सभी ने एक स्वर में कहा चाहे जो कुछ भी हो जाए अब वह सभी अपने वतन पर ही रह कर परिवार की जीविका तलाशेंगे।