फतेहपुर। केंद्रीय बजट में वैसे तो जिले को परोक्ष रूप से कुछ नहीं मिला है, लेकिन केंद्र सरकार ने सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट की व्यवस्था की है। ऐसे में शहर में सीवर लाइन का निर्माण निर्बाध रूप से चलने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
पिछले साल जुलाई महीने में केंद्रीय बजट में शहर में सीवर लाइन निर्माण के लिए 311.40 करोड़ बजट की व्यवस्था की गई थी। इसमें 41.40 करोड़ की पहली किस्त जल निगम को मिल चुकी है। केंद्रीय बजट में सीवर लाइन निर्माण के लिए बजट की व्यवस्था होने से शहर में सीवर लाइन निर्माण को गति मिलना तय है। इसी तरह ओवरब्रिज निर्माण के लिए केंद्रीय बजट में व्यवस्था की गई है।
पिछले साल शहर के शादीपुर रेलवे क्रासिंग निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है। केंद्रीय बजट में धनराशि की व्यवस्था होने से अभी तक शादीपुर रेलवे क्रासिंग पर ब्रिज निर्माण की आशा जीवित है।
उधर केंद्रीय बजट में इनकम टैक्स से छूट दो लाख बढ़ाने का प्रावधान केंद्रीय बजट में किया गया है। अभी तक टैक्स में छूट सिर्फ पांच लाख की सीमा तक रही है, लेकिन अब केंद्र सरकार ने यह छूट बढ़ाकर सात लाख कर दिया है। इससे कर्मचारियों में खासी खुशी की लहर है।
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हर वर्ग को संतुष्ट करने का किया प्रयास
एडवोकेट शरद तिवारी ने बजट पर प्रतिक्रिया में कहा कि संतुलित बजट है। हर वर्ग को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है। इससे रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसानों के लिए प्राकृतिक खेती व एमएसपी पर जोर दिया गया है। युवाओं के लिए वजीफा, रोजगार व कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र, महिलाओं के लिए वर्किंग हॉस्टल और स्टांप की दरों में छूट की घोषणा की गई है। विद्यार्थियों के लिए सस्ता ऋण और मजदूरों के लिए आवास की व्यवस्था का ध्यान रखा गया है। लेकिन सुविधाओं पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत थी।
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रेल बजट में सीनियर सिटीजन को नहीं मिली राहत
रेल बजट में इस बार भी सीनियर सिटीजन को किराए में राहत नहीं दी गई। कोविड काल के बाद से सीनियर सिटीजन इस बजट से छूट की उम्मीद लगाए बैठे थे। कोविड काल से पूर्व रेलवे से सीनियर सिटीजन को किराए में राहत मिलती थी। महिला यात्री को 50 प्रतिशत और पुरुष यात्री को 30 प्रतिशत की राहत दी जाती थी। कोविड काल के बाद इसे बंद कर दिया गया। सीनियर सिटीजन प्रत्येक बजट में इसके शुरू होने की आस लगाते हैं। लेकिन इस बार भी उनको निराशा ही हाथ लगी है।