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Fatehpur News: धोखाधड़ी के आरोपियों का रिमांड खारिज, विवेचक से स्पष्टीकरण मांगा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फतेहपुर। धोखाधड़ी कर ट्रकों को हड़पने के आरोपियों का मजिस्ट्रेट अनुपम कुशवाहा ने रिमांड (न्यायिक अभिरक्षा) खारिज कर दिया। पैरवी पक्ष के अधिवक्ताओं की जिरह के बाद विवेचक को फटकार लगाई। आरोपियों को 20- 20 हजार के निजी मुचलके पर छोड़ा है। कोर्ट ने सात साल की सजा की धाराओं में आरोपियों को रिमांड मांगने पर विवेचक को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का आदेश किया है। कोर्ट ने अवमानना हेतु हाईकोर्ट के समक्ष मामला क्यों न संदर्भित किए जाने की बात कही है। एसपी को आदेश की एक प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है।
जिले के ट्रक मालिकों की ओर से ट्रकों को लीज पर लेकर गायब किए जाने का रायबरेली जिले के सरेनी थाने के भोजपुर निवासी मो. शकील, सरैनी थाने के कहिंजर निवासी राज सिंह उर्फ भोले सिंह, कहिंजर शिवखेड़ा निवासी अमित कुमार पाल व दो अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। एफआईआर सात साल तक की धाराओं में दर्ज की गई। विवेचक सुमित देव पांडेय ने बस्तापुर मोड़ से रविवार को उक्त तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाई। आरोपियों को जेल भेजने के लिए रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट के समक्ष रविवार शाम प्रस्तुत किया। पैरवी पक्ष के अधिवक्ता सर्वेश तिवारी उर्फ दीपू और संदीप पांडेय की ओर कोर्ट में सात साल की सजा की धाराओं में न्यायिक अभिरक्षा निरस्त करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने पुराने मामले भी कोर्ट में जिरह के दौरान प्रस्तुत किए। कोर्ट ने सुनवाई के बाद न्यायिक अभिरक्षा खारिज की। तीनों के निजी 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ दिया। अभियुक्तों को विवेचना में सहयोग का आदेश किया। अधिवक्ताओं के मुताबिक विवेचक को कोर्ट ने फटकार लगाई। विवेचक से स्पष्टीकरण मांगा और एसपी को कार्रवाई के लिए पत्राचार किया है।
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साक्ष्यों के अभाव में धाराएं बढ़ाने में फेल हुई पुलिस
पुलिस ने मामले में आरोपियों के विरुद्घ धारा 420, 406, 504, 506 में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ट्रक कहां खपाए गए। कबाड़ में कटवाए तो उसका साक्ष्य संकलन नहीं कर सकी। इसी वजह से पुलिस सात साल से अधिक की सजा की धाराएं बढ़ाने में असफल हो गई। इसका आरोपियों को फायदा मिला।
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धारा 41 के तहत नोटिस जारी कर आरोपियों को देना चाहिए मुचलका
पैरवी पक्ष के अधिवक्ता सर्वेश तिवारी ने बताया कि सात साल तक की सजा के मामलों में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। पुलिस को धारा 41 के तहत आरोपियों को नोटिस देकर विवेचना में सहयोग करने का आदेश देना चाहिए। पुलिस ने आरोपियों को नोटिस नहीं दिया। गिरफ्तारी का कोई भी कारण केस डायरी में नहीं दर्शाया है।
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