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Fatehpur News: सरकारी में आनाकानी, निजी में होती मनमानी

Mon, 23 Oct 2023 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
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- सरकारी अस्पतालों में उपचार के नाम पर खानापूर्ति, निजी अस्पतालों में कट रही मरीजों की जेब
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। जिले में सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मुफ्त इलाज का दावा जिला अस्पताल में बेपटरी है। ओपीडी, पैथोलॉजी से लेकर वार्डों तक में मरीजों व उनके तीमारदारों को सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बेड फुल होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।
मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उनकी जेब हल्की हो रही है। निजी अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए मरीजों को चार से पांच हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। मरीज को भर्ती करने पर यह खर्च बढ़कर 30 से 35 हजार रुपये तक हो जा रहा है।
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स्वास्थ्य व मलेरिया विभाग हर रोज संभावित डेंगू मरीजों की जांच करता है। अभी तक 9 हजार से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। मलेरिया विभाग के अनुसार अभी तक 126 डेंगू के मरीज मिले हैं। ये रिपोर्ट पूरी तरीके से एलाइजा टेस्ट आधारित है। निजी अस्पतालों व निजी पैथोलॉजी की जांच का कहीं केंद्रीकृत आकड़ा उपलब्ध नहीं है।
एक अनुमान के मुताबिक जिले में पंजीकृत 83 हास्पिटल में लगभग एक से दो डेंगू के मरीजों हर रोज भर्ती हो रहे हैं। इसके शिकार बच्चे भी हो रहे हैं। यह सिलसिला पिछले दो महीने से जारी है। डेंगू के मरीजों की रोकथाम नहीं हो पा रही है। डेंगू के मरीजों के पैरों और हड्डियों में खासा दर्द रहता है। हालांकि प्रशिक्षित डॉक्टर से उपचार पर मरीज ठीक भी हो रहे हैं। मरीज सरकारी अस्पताल में समुचित इलाज नहीं मिलने से निजी का रुख करते हैं। यहां पर मरीजों से उपचार के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है।

निजी अस्पताल में कम से कम पांच हजार का खर्चा
अधिकतर निजी चिकित्सक या अस्पताल बुखार पीड़ित की सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) के साथ ही डेंगू की जांच कराते हैं। पूरी जांच में पंद्रह सौ से लेकर दो हजार रुपये तक खर्च होते हैं। दवा पर सप्ताह भर में करीब तीन हजार रुपये खर्च होते हैं। कुल खर्च लगभग पांच हजार रुपये का बिल बन जाता है। अगर मरीज को भर्ती करना पड़ा तो यह खर्च बढ़कर 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. वरद बिसेन ने बताया कि डेंगू में आंखों, पैरों में दर्द होता है। ये इसके लक्षण हैं। पपीते की पत्ती और बकरी का दूध पीने के लिए चिकित्सा में कोई फायदे नहीं बताए गए हैं। इसके बावजूद लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।
डेंगू दे रहा पैरों में दर्द
वायरल के साथ डेंगू के लक्षण देखे जा रहे हैं। ऐसे मरीजों के पैरों में असहनीय दर्द होता है। प्लेटलेट्स तेजी से घटती हैं और कमजोरी आ जाती है। उपचार के बाद सुधार की स्थिति पर बुखार नहीं आता है। इसका असर तीन दिनों के भीतर ही दिखने लगता है।
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कोट्स
सभी सरकारी अस्पतालों में संबंधित उपचार के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। किसी मरीज को कोई परेशानी हो, तो वह शिकायत करें। संबंधित के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई करेंगे। डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
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