फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehpur News: सूडान से घर पहुंचने पर परिजनों ने ली राहत की सांस

Mon, 01 May 2023 01:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो- 06- संदीप यादव। संवाद
विज्ञापन

-सूडान में गृह युद्ध के चलते राजधानी खार्तून में फंसा था युवक
चौडगरा। विदेश में नौकरी करने गया युवक गृहयुद्ध छिड़ने से स्वदेश लौटने में रुकावट आ गई। परिजनों में चिंता बढ़ गई थी। भारतीय दूतावास की मदद से युवक सकुशल घर लौट आया। परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। मलवां ब्लाक के गांव अहिरनखेड़ा निवासी राकेश कुमार यादव का अठ्ठाइस वर्षीय पुत्र संदीप फरवरी20 22 में सूडान की राजधानी खार्तून गया था। खार्तून स्थित कंपनी ओमेगा स्टील में लैब केमिस्ट के पद पर तैनात था। 15 अप्रैल को अचानक गृहयुद्ध छिड़ने से कंपनी सहित सारा बाजार बंद हो गया। उसने बचे राशन को जैसे तैसे छह दिनों तक चलाया। सभी वर्कर कंपनी में ही छिपे थे। गृहयुद्ध छिड़ने से चोरों के जलवे थे। वे दिनदहाड़े लूट घसोट कर रहे थे। दूतावास की मदद से 23अपैल को बसों द्वारा निकले। फिर समुद्री रास्ते से सउदी अरब पहुंचे। इस बाद सकुशल घर वापसी हुई। घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
-
फोटो- 07- अमर सिंह। संवाद
लाशें और गोलाबारी देख सिहर उठा था अमर
भारतीय दूतावास की मदद से वतन वापसी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिंदकी। सिकठ्ठनपुर निवासी अमर सूडान में छिडे गृहयुद्ध के हालात बयां करते-करते सिहर उठा। आंखों के सामने होती गोलाबारी और लाशों के ढेर का मंजर रूह को कंपा देने वाला था। सही सलामत घर पहुंचने के बाद अमर ने पूरी दास्तान अपने परिजनों को सुनाई। वहीं अपने बेटे को सही सलामत घर वापस देख परिजनों ने खुशी जाहिर किया। बिंदकी कोतवाली के खजुहा चौकी क्षेत्र के सिकठ्ठनपुर गांव के रहने वाले भूरा के पुत्र अमर सिंह सूडान की राजधानी खार्तूम स्थित एक स्टील फैक्ट्री में फिटर की नौकरी करते थे। बीते 15 अप्रैल से सूडान में गृहयुद्ध छेड़ने के बाद वहां के हालात दिन प्रतिदिन बदतर होते चले गए। लोगों के साथ लूटपाट, छीनाझपटी और जान लेने जैसी घटनाएं आमतौर पर होने लगी। 22 अप्रैल से इंडियन एंबेसी की मदद से भारतीय नागरिकों को वापस लाने का काम शुरू किया गया। नौसेना के समुद्री जहाज द्वारा उन्हें समुद्री रास्ते से सऊदी अरब के जिद्दा बंदरगाह पहुंचाया गया। जिसके बाद हवाई जहाज से दुबई होते हुए वह 27 अप्रैल को दिल्ली पहुंचा। दिल्ली पहुंच कर उन्होंने राहत की सांस लिया। अमर ने बताया कि देखते ही देखते आंखों के सामने लोगों की हत्याएं हो रही थीं। गोलीबारी के साथ उठता काला धुआं और लाशों के ढेर देखकर हर पल जीने मरने का खौफ सता रहा था। वापस आने के दौरान उनका मोबाइल व अन्य कीमती सामान छीन लिया गया। घर पहुंचने पर उनके पास मात्र उनका बैग और कुछ कपड़े ही बचे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


फोटो- 08- अजय कुमार। संवाद
वतन वापसी पर परिजनों ने ली राहत की सांस छलके आँसू
मलवां। मलवां थाना क्षेत्र के मीरपुर कुश्ती गांव निवासी अजय कुमार पुत्र भैरव प्रसाद सूडान नौकरी करने गया था। गृहयुद्ध छिड़ने के कारण लौट नहीं पा रहा था। परिजन चिंतित थे। युवक सकुशल घर लौट आया। जिससे परिजनों में खुशी है। अजय ने बताया कि गृहयुद्ध छेड़ने के कारण चारों तरफ लूटपाट मची थी। उससे रुपया, सामान लोगों ने छीन लिया था। 15 दिनों तक भूख प्यास से बेहाल रहे। वतन वापसी की कोई उम्मीद नहीं दिखाई पड़ रही थी लेकिन यह सब सरकार के अथक प्रयास से संभव हो सका कि आज हम अपने मां, पिता व भाई के बीच सकुशल पहुंचे हैं। अजय ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर व कम शिक्षा के कारण वहां पर लोडर व जेसीबी चलाने का कार्य करते थे। 15 अप्रैल से अचानक गृहयुद्ध छिड़ने से सारा बाजार बंद हो गया था। अजय के सकुशल घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें