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Fatehpur News: अवैध फैक्टरी में छापा, 61 किलो बारूद से बने पटाखे बरामद

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फतेहपुर। पटाखा थरियांव थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर मजरे औरई भागूपुर मोड़ से पटाखों के शनिवार को पकड़े गए अवैध भंडारण के मामले में पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम के तहत गोदाम मालिक पर मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने विस्फोटक निस्तारण के लिए दमकल विभाग को रिपोर्ट दर्ज की है। थरियांव थाने के बहरामपुर निवासी पंकज शुक्ला पटाखा विक्रेता हैं। उनका लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हैं। इसके बाद भी गोदाम में लाखों के पटाखे डंप किए थे। पुलिस ने शनिवार को गोदाम में छापामारी की थी। पुलिस ने दो कमरों से 61 किलो अवैध पटाखों के भंडारण पाया। गोदाम को सीज किया। पुलिस ने पंकज शुक्ला पर विस्फोटक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया। उसे गिरफ्तार कर कोर्ट भेजा है। वहीं अग्निशमन अधिकारी पटाखों के विधिक निस्तारण की रिपोर्ट भेजी है।
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फतेहपुर। मानक दरकिनार कर पटाखा बनाने और बेचने वाले छह कारोबारियों के खिलाफ विभाग की रिपोर्ट के बाद डीएम के आदेश पर आयुध विभाग ने लाइसेंस निरस्त किए हैं। साथ नौ कारोबारियों को नोटिस जारी किया गया था। तीन ने स्थान परिवर्तन कर नवीनीकरण करा लिया है।
अग्निशमन विभाग के निरीक्षण दौरान सदर तहसील में शहर के पक्का तालाब में अभिषेक केसरवानी, जुबैर अहमद व एक लोधीगंज के लाइसेंसी पटाखा विक्रेताओं की दुकानें आबादी के बीच में होने पर नोटिस दिया गया था। इसके बाद लाइसेंसधारकों ने दुकानों को शिफ्ट कर दिया है।
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उधर, बिंदकी तहसील के रारी बुजुर्ग गांव में नासिर शाह की फैक्टरी में दो साल पहले विस्फोट हुआ था। विभाग ने उम्रदराज देखते हुए लाइसेंस निरस्त किया है। बिंदकी के महरहा निवासी अंगनू का लाइसेंस भी उम्रदराज होने की वजह से निरस्त किया गया है। खागा तहसील में देवदासपुर में विस्फोट के बाद आले हसन का नवीनीकरण न होने से लाइसेंस निरस्त किया गया है।

इसी क्रम में अब्दुल सत्तार व अब्दुल रसीद के लाइसेंस निरस्त हुए हैं। निरीक्षण में टीम को बार-बार नई जगह दिखाते रहे। खागा तहसील में ही धाता कस्बे में तीसरी मंजिल पटाखा विक्रेता को दुकान हटाने का नोटिस जारी किया गया था। दुकान न हटाने पर लाइसेंस निरस्त किया गया है।



कोट

निरीक्षण दौरान विक्रेताओं और निर्माताओं के यहां खामियां पाई गईं। नोटिस देने के बाद भी सुधार नहीं किया गया। आयुध कार्यालय को रिपोर्ट बनाकर भेजी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस निरस्त हो चुके हैं। सातों धरमपुर हादसे की जांच की जा रही है। लाइसेंस 2025 तक मान्य है। बाकी बिंदुओं की जांच की जा रही है।-उमेश गौतम, सीएफओ



फोटो-15- सातों धरमपुर गांव में इसी जगह हुआ हादसा। संवाद



फोटो-16- मानक विहीन जर्जर कोठरी पटाखा निर्माण में की जाती रही इस्तेमाल

पलीता काटने में हादसा तीन साल बाद दोहराया

- 24 अक्तूबर 2021 में देवदासपुर में भी पलीता काटने में हुई थी घटना



- लाइसेंसी की पत्नी की मौत और दो लोग थे झुलसे

संवाद न्यूज एजेंसी



फतेहपुर। सातों धरमपुर गांव में पटाखा फैक्टरी में पलीता काटते समय आग लगने से हादसे में पिता-पुत्र की मौत की घटना तीन साल बाद दोहराई गई है। तीन साल पहले भी देवदासपुर गांव में पटाखा फैक्टरी में पलीता काटते समय हादसा हुआ था। हादसे में महिला की मौत हो गई थी।

हादसा हथगाम थाने के छिवलहा कस्बा देवदासपुर रोड पर करीब आले हसन पटाखा निर्माण के 25 साल पुराने लाइसेंसी थे। उनकी फैक्टरी में 24 अक्तूबर 2021 को विस्फोट हुआ था। हादसे में लाइसेंसी की 65 वर्षी पत्नी कनीज फातिमा और साथी महिलाएं गुलशन, नगीना झुलसी थीं। इलाज दौरान कनीज फातिमा की मौत हो गई थी।



जांच में सामने आया था कि गुलशन पलीता काट रही थी। औजार हाथ से फिसला था। चिंगारी से आग फैक्टरी में आग लगने से हादसा हुआ था। इस घटना की पुनरावृत्ति सातों धरमपुर में होना माना जा रहा है। साताें धरमपुर गांव में भी आतिशबाज चांदबाबू और उसके पुत्र आसियान की मौत भी पलीता काटने के दौरान हुई है।

दोनों हादसे पलीता काटने के दौरान हुए। इस तरह पटाखा निर्माण के दौरान तीन साल बाद देवदासपुर हादसे की पुनरावृत्ति हुई। सीएफओ उमेश गौतम ने बताया कि बारूद के संपर्क में हल्की चिंगारी विस्फोट और आग लगने का कारण बन जाती है। दोनों हादसे पलीता काटते समय हुए हैं। पलीते की सुतली बारूद में डुबोई रहती है। बारूद डुबोये पलीता काटे जाते हैं। कील, कंकड़ जैसी वस्तु भी संपर्क में आने से हादसा होता है।





हादसे के बाद भी प्रशासन की कारगुजारी पर उठे सवाल

- जर्जर कोठरी व जंग लगे यंत्रों को अनदेखा किया



- फैक्टरी में तैयार माल की जांच तक नहीं की गई

संवाद न्यूज एजेंसी



असोथर। थाना क्षेत्र के सातों धरमपुर में शुक्रवार को पटाखा फैक्टरी में लाइसेंसी चांदबाबू और उसके पुत्र आसियान की मौत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की कारगुजारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। माना जा रहा है कि पहले क्षेत्रीय पुलिस व अग्निशमन विभाग यहां कभी नहीं आया। ऐसी जर्जर कोठरी में फैक्टरी संचालित थी, जो कभी भी धरासाई हो सकती थी। इसके अलावा भी कई सवाल उठे, जिन पर कोई गौर नहीं किया गया। घटना स्थल के कुछ दूर आबादी के बीच आतिशबाज का घर है। जहां कई महीनों का तैयार माल इकट्ठा होना बताया जा रहा है। उसे भी चेक नहीं किया। अग्निशमन यंत्र जंग खाये हुए थे। ग्रामीणों ने बताया कि कोई कभी यहां चेकिंग को नहीं आया है। आबादी के बीच कमरे में रखी आतिशबाजी से भी हादसा हो सकता है। हादसे के बाद गांव में अधिकारियों का आना-जाना रहा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।



त्योहार पर शिवाकाशी,सहारनपुर से आई बारूद की खेप



- जिले में अधिकतम 25 किलो बारूद डंप का लाइसेंस

- लाइसेंसी ही अपने हाथों से रजिस्टर भरकर चेक कराते



संवाद न्यूज एजेंसी

फतेहपुर। सालों साल चलने वाले पटाखा व्यवसाय में दीपावली का मौका कारोबारियों के लिए खास होता है। बेचने वाले चोरी छिपे बिना लाइसेंस के पहले से ही पटाखों का भंडार लगाने लगते हैं। निर्माण करने वाले कई महीने से बारूद डंप करना चालू कर देते हैं। कारोबारियों को महज 15 से अधिकतम 25 किलो बारूद डंप करने का लाइसेंस आयुध विभाग की ओर से दिया गया है। जबकि खपत इससे कई गुना अधिक की है।



पटाखा फैक्टरी संचालकों को आयुध विभाग से खरीद फरोख्त का एक रजिस्टर जारी होता है। उन्हें रजिस्टर में सारी जानकारी रखनी होती है। कभी भी उनके रजिस्टरों का औचक निरीक्षण नहीं किया जाता है। ऐसे में वह आयुध विभाग में नवीनीकरण के लिए ही जाते हैं। इस दौरान सबकुछ अपने हाथों से खरीदने और बेचने का ब्यौरा दर्ज कर लेते हैं। सातों हादसे के बाद ग्रामीणों ने बताया कि करीब छह माह पहले से पटाखा निर्माण का कार्य हो रहा था। छह माह में फैक्टरी में लाइसेंस क्षमता से कई गुना बारूद लाई जा चुकी होगी। जिले में अधिकांश पटाखा फैक्टरी संचालकों को 15 किलो बारूद और 50 किलो की तैयार सामाग्री रखने की अनुमति है। लाइसेंसी पटाखा विक्रेताओं के पास भी 50 किलो तक के ही पटाखा भंडार की अनुमति है। क्षमता से कई गुना पटाखों का भंडार किया जाता है। अब प्रशासन ने निर्माताओं के रजिस्टर की जांच शुरू की है। निर्माता बारूद की खेप सहारनपुर, शिवाकाशी से मंगवाते हैं। यहां से बारूद कम दाम में मिलता है। कानपुर में भी बारूद विक्रेता हैं। यहां बारूद का भाव अधिक होता है।

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इनसेट

जांच को संयुक्त टीम बनाई गई



डीएम रवींद्र सिंह ने हादसे के बाद पटाखा लाइसेंस व अवैध भंडारण की जांच को एसडीएम, सीओ व अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम का गठन किया है। टीमें थाना स्तर पर लाइसेंसी फैक्टरी का निरीक्षण करेंगी। उनके रजिस्टर का ब्यौरा चेक करेंगी।
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इनसेट

जिले में पटाखा निर्माण लाइसेंस



सदर तहसील - 43

खागा तहसील -29



बिंदकी तहसील- 21

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कुल - 93

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इनसेट

पटाखा निर्माण के मानक



-लाइसेंसी पटाखा निर्माताओं के लिए जिले में 15 किलो बारूद व अन्य विस्फोटक सामाग्री रख सकते हैं

- करीब 50 किलो तक की निर्मित सामाग्री रख सकते हैं



- निर्माण स्थल आबादी से 50 मीटर दूर होना चाहिए

- निर्माण स्थल की पक्की छत व नौ से 25 वर्ग मीटर चौड़ाई की होनी चाहिए



- 15 मीटर के दायरे में स्कूल, अस्पताल, बड़ी इमारत, कोई कार्यस्थल नहीं हो

- आग बुझाने के लिए दो अग्निशमन यंत्र, दो पानी भरे ड्रम, दो बाल्टी, 100 घन मीटर बालू



- निर्माणस्थल की चौहद्दी पर आपात हेल्पलाइन नंबर दर्ज होने चाहिए

- आसपास से एचटी लाइन न गुजरी हो, चोरी की आशंका भी स्थल पर कम हो



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इनसेट



पटाखा फैक्टरियों में हादसे

- 14 अक्तूबर 2022 को हसवा में पटाखा निर्माण फैक्टरी में विस्फोट



- 24 अक्तूबर 2021 को हथगाम थाने के देवदासपुर में फैक्टरी में विस्फोट महिला की मौत,दो झुलसे

- अक्तूबर 2021 में बिंदकी कोतवाली क्षेत्र में पटाखा फैक्टरी में धमाका



- 12 नवंबर 2020 को मसवानी मोहल्ले में सूरज शुक्ला की पटाखाें के धमाके से मौत

- 12 नवंबर 2020 को हथगाम थाने के अमलिहापाल गांव में अवधेश का पटाखा धमाके से हाथ उड़ा



- 2018 नवंबर पहाड़ीपुर से पटाखा लेकर आते समय धमाके में बाइक सवार आबूनगर के युवक की मौत

- एक दशक पहले ललौली थाने के सातआना में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से दो की मौत



- डेढ़ दशक पहले जाफरगंज में पटाखा निर्माण में पिता व दो पुत्रियों की विस्फोट से मौत

- बिंदकी कोतवाली के मुगलाही मोहल्ले में पटाखा निर्माण दौरान एक युवक की हो चुकी मौत
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