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अब परिवार व मवेशियों की सताने लगी चिंता

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फतेहपुर। यमुना नदी की बाढ़ कम होते ही तटवर्ती गांव में लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। फसलों के तैयार होने पर परिवार के लिए सपने देखने वाले किसान अब मायूस नजर आ रहे हैं। उनको परिवार का खर्च चलाने और मवेशियों के पेट भरने की चिंता सता रही है। यमुना तिरहार के कई तटवर्ती गांव में अभी भी कीचड़ बना हुआ है। लोग कीचड़ में अपने मवेशियों को बांध रहे हैं और आवागमन कर रहे हैं। यमुना नदी का पानी लगातार कम हो रहा है। इससे जहां लोगों को बाढ़ के भय से राहत मिल गई है। वहीं बाढ़ से बर्बादी का मंजर भी निखरने लगा है। बर्बाद हुई गृहस्थी, गिरे घर और बाढ़ के कहर में समाई फसलों को देख कर लोगों को परिवार पालने के चिंता सताने लगी है। फसलों के नष्ट होने से मवेशियों का चारा भी नहीं बचा है। वहीं किशनपुर क्षेत्र के असहटा, बहुआ क्षेत्र का पलटू का पुरवा गांव अभी भी बाढ़ से ग्रसित है। लोगों को बाढ़ के पानी से होकर आवागमन करना पड़ता है। बाढ़ नियंत्रण की रिपोर्ट के अनुसार ललौली में 98.350 मीटर पर यमुना का पानी बह रहा है। जो खतरे के निशान से करीब साढ़े चार मीटर नीचे हैं।
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