संवाद न्यूज एजेंसी
औंग। पर्यावरण प्रदूषण और दूषित भूगर्भ जल से क्षेत्र में हाहाकार मचा है। केमिकल फैक्टरियों की मनमानी का खामियाजा क्षेत्रीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अमर उजाला ने प्रमुखता से 11 जून से लगातार पर्यावरण प्रदूषण और दूषित भूगर्भ जल की समस्या प्रकाशित की।
खबरों का संज्ञान लेकर मंगलवार को क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड प्रयागराज से क्षेत्रीय अधिकारी राकेश कुमार सिंह, एई कौशल कुमार, जनरल रिसर्च सेक्शन के संदीप तथा नायब तहसीलदार बिंदकी विजय प्रकाश तिवारी, राजस्व लेखपाल शुभम सिंह ने गोधरौली गांव स्थित मधुचंद्रा टेक्नो केमिकल फैक्टरी की जांच की। फैक्टरी के अंदर तरल अपशिष्ट बोरवेल से धरती के कोख में ठूंसा जा रहा था। बोरवेल को पन्नी से ढक दिया गया था।
फैक्टरी के टैंक में तेजाब मिश्रित केमिकल भरा है। बना हुआ केमिकल बोरियों में भरा है। फैक्टरी में ठोस अपशिष्ट केमिकल कचरा बड़ी मात्रा में डंप है। मधुचंद्रा टेक्नो केमिकल फैक्ट्री के डंपिंग यार्ड में भारी मात्रा में केमिकल कचरा डंप है। हालांकि कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए तीन दिन से रात दिन जेसीबी लगाकर हजारों डंपर केमिकल कचरा जमीन में दबाया जा चुका है। रात में डंपरों से भरकर दूरदराज के सुनसान स्थानों में फेंका गया है। टीम ने केमिकल कचरे का नमूना, फैक्टरी में पानी का नमूना जांच के लिए एकत्र किया है।
प्रदूषण के नियमों को ताक में रखकर नैसर्गिक संसाधनों को प्रदूषित करने की फैक्टरी की दबंगई देखकर अधिकारी भौंचक्के रह गए। फैक्ट्री में रसूखदार दबंग ठेकेदारों का बोलबाला है। ठेकेदार ही क्षेत्र के तालाबों, पोखरों, सार्वजनिक स्थानों सड़कों पर कचरा फेंका गया है। इससे ही पर्यावरण प्रदूषण व दूषित भूगर्भ जल की स्थिति खराब हुई है।
35 साल से मधुचंद्र टेक्नो केमिकल फैक्टरी फैला रही प्रदूषण
मधु चंद्रा टेक्नो केमिकल फैक्टरी की स्थापना 1988 में हुई थी। उड़ीसा की मिट्टी से तेजाब मिलाकर केमिकल कलर बनाया जाता है। कलर बनाने के बाद तेजाब युक्त ठोस अपशिष्ट को रसूखदार दबंग ठेकेदार फैक्टरी से बाहर फेंकते हैं। तरल अपशिष्ट को फैक्टरी प्रबंधन बोरवेल से जमीन में ठूंस देता है। कागजों में फैक्ट्री बंद दर्शाई गई है। लेकिन कर्मचारी मजदूर उपस्थित मिले। धुआं चिमनी के बाहर शेड के नीचे फैल रहा था। अधिकारियों के आने की भनक लगने से फिलहाल फैक्ट्री बंद कर दी गई थी।
हैंड पंप के पानी का नमूना लिया
क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज से पर्यावरण प्रदूषण टीम ने गोधरौली गांव में हैंडपंपों का पानी देखा। कई प्रदूषित पानी के नमूने जांच के लिए साथ ले गई। गांव में तालाबों पोखरों में फेंका गया केमिकल कचरा भी टीम ने देखा है।
-छिवली गांव में डंपयार्ड भी देखा
नायब तहसीलदार बिंदकी के साथ टीम ने क्षेत्र के आशापुर ,अभयपुर, रहसूपुर ,शादीपुर, छिवली गांव में केमिकल फैक्ट्रियों का डाला गया कचरा देखा। धीरे-धीरे दूषित भूगर्भ जल की समस्या क्षेत्र में नासूर का रूप ले रही है। रहसूपुर गांव में हाईवे में भी तीन केमिकल फैक्ट्रियां संचालित हैं। इनका केमिकल कचरा दबंग ठेकेदार क्षेत्र के आसपास गांव के साथ पांडु नदी की जलधारा में रातों-रात फेकते हैं।
क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड प्रयागराज राकेश कुमार सिंह ने बताया जांच के लिए फैक्ट्रियों के केमिकल कचरे के नमूने तथा पानी के नमूने लिए गए हैं। प्रथम दृष्टया दूषित भूगर्भ जल और प्रदूषित पर्यावरण इन केमिकल फैक्ट्रियों का परिणाम है। बगैर एनओसी के चल रही कबाड़ के टायर गलाने वाली फैक्ट्रियों पर निश्चित कार्रवाई की जाएगी।