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Fatehpur News: जिला अस्पताल में बनेगा 42 बेड का पीकू वार्ड

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फोटो- 1- इसी शिशु वार्ड में बनेगा गहन बाल चिकित्सा वार्ड (पीकू) वार्ड। संवाद



खास खबर:

जिला अस्पताल में बनेगा 42 बेड का पीकू वार्ड



संवाद न्यूज एजेंसी

फतेहपुर। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिले के लिए अच्छी खबर है। सदर अस्पताल में जल्द गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों एवं किशोरों के बेहतर इलाज के लिए 42 बेड के पीकू वार्ड का निर्माण गुरुवार से शुरू होगा। इस वार्ड के 20 बेड आईसीयू से जोड़े जाएंगे और 22 बेड सामान्य होंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस पीकू (पीडियाट्रिक इन्टेंसिव केयर यूनिट) वार्ड में 29 दिन के बच्चों से लेकर 17 वर्ष के गंभीर किशोरों के इलाज की सभी चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

पीकू वार्ड बनने के बाद गंभीर बीमार बच्चों एवं किशोरों को इलाज के लिए जिले से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आईसीयू की तर्ज पर वार्ड का निर्माण होने के बाद सदर अस्पताल से बच्चों को रेफर करने की समस्या भी नहीं होगी। बताते चलें कि अभी वर्तमान में सदर अस्पताल में एसएनसीयू वार्ड में शून्य से 28 दिन के बच्चों का इलाज किया जा रहा है। 29 दिन से ऊपर आयु के बच्चों को गंभीर स्थिति में रेफर किया जाता है। बच्चों के बेहतर इलाज के लिए परिजनों को किसी निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है या फिर दूसरे जिले में जाना पड़ता है।
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अस्पताल सदर भवन के तीसरी मंजिल पर पीकू वार्ड बनाने के लिए जगह चिह्नित की गई है। गुरुवार से पीकू वार्ड का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। पीकू वार्ड बच्चों के लिए एक तरह से आईसीयू के रूप में तैयार किया जाएगा। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस पीकू वार्ड में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के जीवन की रक्षा हो सकेगी।

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क्या है पीकू (गहन बाल चिकित्सा वार्ड)

पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) में 29 दिन से 17 साल के गंभीर किशोर को भर्ती किया जाता है। इसे गहन बाल चिकित्सा वार्ड भी कहा जाता है। पीकू में इमरजेंसी जांच से जुड़े सभी संसाधन उपलब्ध होते हैं। इनमें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन आदि शामिल हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की तैनाती रहती है। इसके अलावा रेडियेंट वार्मर, ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर, इन्फ्यूजन पंप, मल्टीपैरामीटर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, लेरिंगोस्कोप सहित एक दर्जन से ज्यादा जीवन रक्षक उपकरण लगाए जाते हैं।

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मरीजों पर कर्मियों की टीम रखती है निगरानी

पीकू वार्ड के मरीजों पर कर्मियों की एक टीम 24 घंटे निगरानी रखती है। कई ट्यूब, तार और केबलों से मरीजों के आसपास के उपकरणों को जोड़ा जाता है। आम तौर पर प्रत्येक एक या दो मरीज के लिए एक नर्स होती है। जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं, उन्हें तरल पदार्थ और पोषक तत्व देने के लिए ट्यूब लगाई जाती है।
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कोट:

जिला अस्पताल के तीसरी मंजिल में पीकू वार्ड बनाने का चयन हुआ है। गुरुवार से पीकू वार्ड बनाने का काम शुरू होगा। वार्ड के 20 बेड आईसीयू से जोड़े जाएंगे और 22 बेड सामान्य रहेंगे। जिला अस्पताल के चिकित्सक शुभम मिश्रा को आईसीयू का प्रभारी बनाया गया है। साथ में नर्स सुभावती की ड्यूटी लगाई गई है। - पीके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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