फतेहपुर। डायलिसिस यूनिट के एक महीने से दोनों एसी खराब हैं। इससे गर्मी में पसीना बहाते हुए मरीजों को डायलिसिस करानी पड़ी रही है। ऐसे में संक्रमण का भी खतरा है, जबकि डायलिसिस यूनिट में ठंडक होना आवश्यक है। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
सदर अस्पताल में तीन सालों से डायलिसिस यूनिट का संचालन हो रहा है। इन दिनों प्रतिदिन 20 से 24 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। यूनिट का संचालन सुबह 5.30 बजे से रात्रि 11.30 तक चार शिफ्टों में होता है। एक मरीज के रक्त शोधन प्रक्रिया में चार घंटे का समय लगता है। हर समय सभी बेड फुल रहते हैं, लेकिन ऐसी भीषण गर्मी में डायलिसिस सेंटर के एक महीने से दोनों एसी नहीं चल रहे हैं। पंखों के सहारे मरीजों को गर्मी से राहत देने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में मरीज डायलिसिस के दौरान पसीना-पसीना हो रहा हैं।
सदर तहसील के केवई गांव निवासी अमर सिंह ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार की डायलिसिस करवाने के लिए आए हैं। यूनिट के अंदर गर्मी के कारण मरीज परेशान थे। ऐसी गर्मी में यूनिट में ठंडक न होने से मरीज के प्रति डर लगा रहता है कि कहीं संक्रमण न हो जाए।
शाह कस्बा निवासी पवन कुमार ने बताया कि रिश्तेदार को देखने के लिए डायलिसिस यूनिट आए हैं। मरीज से मिलने के लिए चार घंटे इंतजार करने के लिए बोला गया। डायलिसिस के बाद मरीज का गर्मी से बुरा हाल था।
डायलिसिस यूनिट के एसी बनने का कोटेशन कंपनी के पास भेज दिया गया है। एक दो दिन में एसी चलने लगेंगी।
-प्रिंस बाजपेई, डायलिसिस यूनिट इंचार्ज