राधानगर बक्सपुर में उगते सूर्य को अर्घ्य देती महिलाएं।
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फतेहपुर। लोक आस्था के महापर्व छठ के अंतिम दिन सोमवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। सुबह अर्घ्य के बाद व्रती घरों की ओर लौट गए। नहाय खाय से शुरू हुए चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो गया। इसके पहले रविवार को व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था। छठ घाटों पर व्रतियों के जाने का सिलसिला सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था। भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तों के अटल आस्था का अनूठा पर्व छठ पर्व है। शहर के पुलिस लाइन, पीएसी कालोनी और राधानगर बक्सपुर क्षेत्र में प्रात:काल महिलाएं सिंघाड़ा, नारियल, फ ल, हल्दी, मूली व गन्ने, गाय का दूध, संतरा आदि से सजी बांस की टोकरी लेकर नंगे पैर घाट पहुंची। यहां पर गीत संगीत के बीच महिलाओं ने पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया और संतान सुख और परिवार की समृद्धि की कामना की। अंत में व्रती ने कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण किया। आचार्य केके पांडेय ने बताया कि अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया जाता है। इस पूजा में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। लहसुन, प्याज नहीं खाया जाता है। जिन घरों में यह पूजा होती है वहां भक्ति गीत गाए जाते हैं।