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अब पूरा अस्पताल नहीं होगा सील

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- कोरोना मरीज के कमरे को तीन-चार दिन के लिए सील कर दिया जाएगा संवाद न्यूज़ एजेंसी फतेहपुर। अब कोरोना वायरस मरीज मिलने पर समूचे अस्पताल को सील नहीं किया जाएगा। उसी स्थान को इस दायरे में लाया जाएगा जहां संक्रमित मरीज रहा है। निजी अस्पतालों को भी सरकारी अस्पतालों जैसी सेवाएं देने की इजाजत होगी लेकिन कोरोना के संदिग्ध लक्षण दिखने वाले मरीज का यह अस्पताल इलाज नहीं कर पाएंगे। दो महीने तक लॉक डाउन के चलते बाधित रहीं स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे पटरी पर लाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। 25 तारीख को मिले शासनादेश के बाद सीएमओ डॉक्टर उमाकांत पांडे ने सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को शासन की गाइडलाइन से वाकिफ कराने के लिए सेंटर के प्रभारी और अधीक्षक को पत्र जारी किए । इस शासनादेश में सामान्य ओपीडी को जगह नहीं मिली है। मतलब साफ है कि अभी विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवाएं नहीं मिलेंगी। सर्जिकल ओपीडी जरूर चलेगी। सीएमओ ने बताया कि अब अगर किसी अस्पताल में कोई मरीज कोरोना वायरस के खतरे से ग्रसित पाया जाता है तो उस अस्पताल को पूरी तरह से सील नहीं किया जाएगा। जिस कमरे या जिस वार्ड में ऐसा रोगी होगा। उसे ही सील किया जाएगा। यह मियाद भी 3 से 4 दिन की होगी। अभी सामान्य ओपीडी को छोड़कर लगभग सारी सेवाएं शुरू की जानी है। टीबी और एचआईवी ग्रसित लोगों को दवाइयां अस्पताल से मिलनी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले स्टाफ का लगातार स्वास्थ परीक्षण किया जाएगा। प्राइवेट अस्पताल कोरोना वायरस के लक्षण से ग्रसित मरीज का इलाज नहीं करेंगे। ऐसे केस सरकारी अस्पताल को हैंडल करना होगा।
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