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पाकिस्तान का नाम सुन खून खौलता है: रामपाल फौजी

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हथगाम। 1971 की जंग में पाकिस्तान के साथ लड़ाई में शामिल फौजी रामपाल का कहना है कि पाकिस्तान का नाम सुन खूल खौल उठता है। क्षेत्र के गोदाम पर गांव के रहने वाले सेवानिवृत्त फौजी कहते हैं कि 1971 में महज तीन दिसंबर से 16 दिसंबर तक युद्ध चला था। 13 दिन के युद्ध के अंतिम दिन 16 दिसंबर को ही पाकिस्तानी सेना की 93 हजार सेना को सरेंडर होना पड़ा था। उन्होंने बताया की हम लोग सेवन इंफिनिटिव डिवीजन में सैनिक थे। हमारी तरह 7-8 डिवीजन और पाकिस्तानियों से लड़ने के लिए मैदान में आ गई थीं। एक-एक डीयू में 15-15 हजार सैनिक शामिल थे। हम लोग सड़क मार्ग से जाकर लाहौर सेक्टर में अपना कब्जा जमा कर मक्के के खेत में उतर कर पाकिस्तानियों को खदेड़ा था। चारों तरफ से पाकिस्तानी सैनिक घिर गए थे। रामपाल फौजी का कहना है कि आज भी वह दिन याद है। पाकिस्तान का नाम सुनते ही उनका खून खौल उठता है। लगभग 90 साल की उम्र के बाद भी रामपाल फौजी मूछों पर हाथ फेरते हुए कहते हैं कि अभी जरूरत पड़ी, तो देश के लिए बलिदान होने के लिए समर्पित हैं। रामपाल फौजी के चार भाई सेना में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं।
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