संवाद न्यूज एजेंसी
हसवा। गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन इलाज के लिए नियुक्त कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) के कारनामे गजब हैं। अस्पताल में न रहते हुए भी ऑनलाइन उपस्थित दर्ज हो जाती है। मंगलवार को चिकित्सा प्रभारी के निरीक्षण में अस्पताल में ताला बंद मिला, वहीं मोबाइल में उपस्थित दर्ज मिली।
ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 18 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। मंगलवार को चिकित्सा प्रभारी डॉ. अनुपम सिंह उपस्वास्थ्य केंद्र एकारी पहुंचे। वहां पर ताला बंद मिला। तैनात सीएचओ अंशिका गुप्ता नदारद थीं। चिकित्सा अधिकारी को ग्रामीणों ने बताया कि माह में केवल 8 से 10 दिन अस्पताल खुलता है। अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ बजे है, लेकिन सीएचओ के आने जाने का समय निश्चित नहीं है।
अस्पताल बंद होने के बावजूद आनलाइन उपस्थित दर्ज मिली। लोगों ने बताया कि एक स्थानीय व्यक्ति मोबाइल से फोटो खींच कर अपलोड कर देता है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. अनुपम सिंह ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों की दी है। सीएचओ अंशिका गुप्ता का इस माह का वेतन रोका जाएगा। फर्जी उपस्थिति लगाने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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चलेगा अभियान
हसवा। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिन सेंटरों में फर्जी उपस्थिति लगाई गई है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फर्जी उपस्थिति लगाना अपराध है। जिसमें जेल तक जाना पड़ सकता है। बताया कि कई जगहों से इस तरह की शिकायतें आ रही हैं। (संवाद)
यह है काम
हसवा। गांवों में तैनात सीएचओ का कार्य गांव के मरीजों को दवा देना है। यदि मरीज की हालत उनके बेहतर नहीं होती है, तो संबंधित पीएचसी व सीएचसी में रेफर करना है। (संवाद)
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