- आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ाने पर जोर, पुरानी पद्धति से उपचार के तरीके सीखेंगे ग्रामीण- थरियांव किसान विज्ञान केंद्र में तैयार की गई औषधि वाटिका
फोटो-05- किसान विज्ञान केंद्र में औषधि वाटिका में तैयार पौधे। संवाद
एक्सक्लूसिव
नमित शुक्ला
फतेहपुर। जिले भर की ग्राम पंचायतों के खेलकूद पार्कों में औषधि वाटिका तैयार की जाएगी। वाटिका में आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े पौधे लगाए जाएंगे। इसका मकसद मौसमी और कई बीमारियों का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार है। यह योजना प्रदेश के लिए मॉडल होगी। थरियांव किसान विज्ञान केंद्र में औषधि वाटिका तैयार की गई है। वाटिका में आयुर्वेद से जुड़े कई तरह के पौधे लगाए गए हैं, जो कई बीमारियों की दवा के रूप में काम आते हैं।
कोविड के दौरान आयुर्वेद की कई दवाएं कोरोना को मात देने में भी सहायक सिद्ध हुई थीं। लोगों को आयुर्वेद उपचार की तरफ रुझान भी बढ़ा। ये पौधे गांवों में पहले आसानी से मिल जाते थे लेकिन आधुनिक जीवन शैली में एलोपैथिक दवाओं के बीच गायब हो गए हैं। इस बीच थरियांव के किसान विज्ञान केंद्र की औषधि वाटिका पुरानी पद्धति के उपचार के दौर में लौटने की जिले में मॉडल बनकर उभरी है।
इस मॉडल को डीएम श्रुति ने पूरे जिले में लागू करने की योजना बनाई है। उन्होंने जिले भर के ग्राम पंचायतों के खेलकूद पार्कों में औषधि वाटिका बनाने का निर्देश दिया है। ये वाटिका वित्त आयोग और मनरेगा की धनराशि से तैयार होगी। वाटिका तैयार करने के बाद ग्रामीणों को एक-एक औषधि से परिचित कराया जाएगा और उपचार की विधि भी बताई जाएगी। उन्हें घर-घर आयुर्वेद के पौधे लगाने के लिए प्रत्साहित भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य आयुर्वेद उपचार पद्धति को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति औसत खर्च को कम करना है। ये फार्मूला कामयाब हुआ, तो प्रदेश में जिला आयुर्वेद के मामले में मॉडल बनेगा।
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वाटिका में लगेंगे ये आयुर्वेदिक पौधे
वाटिका में कालमेघ, सतावर, अश्वगंधा, सर्पगंधा, पिपली, स्टीबिया, चिरायता, रुद्राक्ष, गिलोय, एलोबेरा, लटजीरा समेत अन्य लाभकारी पौधे लगाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र के डाक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि अश्वगंधा स्मरण शक्ति कमजोर होने से रोकता है। तनावरोधी के साथ इम्युनोमाड्यूलेटरी होता है। हाई ब्लड प्रेशर के लोगों के लिए सर्पगंधा विश्वसनीय दवा है। स्टीबिया का प्रयोग शक्कर की जगह किया जा सकता है। ये कैलोरी रहित होता है। इसका उपयोग दांत, मसूड़ों के उपचार में किया जाता है। कालमेघ को बुखार की दवा के रूप में लिया जा सकता है। इसी तरह से हर औषधि की अपनी खासियत है।
कोट्स
डीएम के निर्देश पर औषधि वाटिका तैयार की जा रही है। यह हर ग्राम पंचायत के खेलकूद पार्क में तैयार होगी। इस वाटिका को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा, जिससे वह इसका लाभ भी ले सकें। उपेंद्र राज सिंह, डीपीआरओ, फतेहपुर