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Fatehpur News: छोटे-बड़े व्यापारियों के बीच फंसी मदरी मिर्च मंडी

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अमौली। मंडी समिति अमौली से एक किमी दूर मदरी में लगने वाली मिर्च मंडी का विवाद छोटे-बड़े व्यापारियों के बीच फंस गया है। दोनों तरफ से अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की जोर आजमाइश चालू है।
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20 साल से भी अधिक समय से यहां पर मिर्च मंडी लगती है। इससे पूर्व यह मंडी जहानाबाद में लगती थी। क्षेत्र के किसानों को दूर जाना पड़ता था और वहां पर व्यापारी मनमाने रेट लगाकर नकद भुगतान भी नहीं करते थे। इससे आजिज आकर छोटे व्यापारियों ने मदरी में मिर्च की खरीद शुरू कर दी। 10 किलोमीटर रेंज के गांव कुलखेडा, चतनपुर, मिर्जापुर, अमौली, सैठी, भाजीताला, सरहन खुर्द, सरहन बुजुर्ग, भगलापुर, बिजौली, बुढ़वा, गड़वा, मकरंदपुर, पाराधनई, गौरा, कछेवरा, सठिगवां आदि गावों के किसानों को सही एवं नकद मूल्य मिलने से मदरी मिर्च मंडी का रूप बड़ा हो गया।
जहानाबाद में छह-सात लाइसेंस वाले बड़े व्यापारी हैं, जो छोटे व्यापारियों से मिर्च खरीद कर दिल्ली, पंजाब, गोरखपुर, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश भेजते हैं। प्रत्येक वर्ष 10 लाख तक की मिर्च पैदावार करने वाले कुलखेड़ा के किसान पुत्ती सिंह, अमौली के नीरज, फूलचंद्र, करोड़ी कुशवाहा, जगदीश आदि ने बताया कि बड़े व्यापारियों की नजर लगी है कि यदि जहानाबाद मंडी शिफ्ट हो जाए, तो फिर बीच के छोटे व्यापारी समाप्त हो जाएंगे और फिर मनमाने रेट से उधार मिर्च मिलने लगेगी। इससे किसानों का शोषण होगा और लोग फिर मिर्च की कम पैदावार करेंगे।
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मंडी सचिव आशीष यादव ने बताया कि सरकार की मंशा है कि मंडी समिति से ही किसानों का मॉल बाहर भेजा जाए। इससे उनकी सभी प्रकार से सुरक्षा हो और सही मूल्य मिले।
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