फोटाे - 37 - 25 मार्च को प्रकाशित खबर
-अमर उजाला इंपैक्ट
- डीएम ने एसडीएम, सीएमओ, ड्रग इंस्पेक्टर और कोषागार अधिकारी को किया नियुक्त
- सेवानिवृत्त कर्मचारी ने कोषागार से सरकारी धन हड़पने का किया किया था प्रयास
- चार लाख रुपये की दवाओं के लगाए थे फर्जी बिल, शुरू हुई जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कोषागार से सरकारी धन हड़पने के प्रयास के मामले में जांच टीम गठित हो गई। डीएम सी. इंदुमती ने मामले को संज्ञान में ले कर एसडीएम, सीएमओ, ड्रग इंस्पेक्टर और कोषागार अधिकारी की संयुक्त टीम गठित कराकर जांच का आदेश दिया है।
सिंचाई विभाग के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने अपने और पत्नी के स्वास्थ्य संबंधी दवाओं के चार लाख रुपये के फर्जी बिल लगा कर कोषागार में जमा किए। कोषागार अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिल देखकर रुपये देने से पहले संदेह जताया और उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराया। मामला एडीएम अविनाश त्रिपाठी के पास पहुंचा। उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर संजय दत्त और तहसीलदार को संबंधित मेडिकल स्टोर की जांच करने का निर्देश दिया। दोनों अधिकारियों ने 23 मार्च को बिल बाउचर में लिखे नाम और पते के आधार पर शहर के शादीपुर चौराहा के समीप स्थित एक मेडिकल स्टोर में पहुंच कर जांच की। लेकिन बिल वाउचर में लिखे मेडिकल स्टोर का नाम और मेडिकल स्टोर के लाइसेंस के नाम में अंतर मिला। इस पर टीम बैरंग लौट गई और अपनी रिपोर्ट पेश की। 25 मार्च के अंक में अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। कोषागार अधिकारी योगेश पांडेय ने बताया कि डीएम ने मामले काे संज्ञान में ले कर जांच टीम गठित की है और जल्द ही आदेश मिलने के बाद जांच शुरू की जाएगी।
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अधिशासी अभियंता और सीएमएस से पास हो गया था बिल
कोषागार में लगे दवाओं के बिल सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता और जिला अस्पताल के सीएमएस के पास से पास हो गए थे। लेकिन कोषागार जाने के बाद मामला पकड़ में आ गया। सेवानिवृत्त कर्मचारी ने दवाओं की डोज से 10 गुना अधिक दवा खरीदने के बिल लगाए हैं। जांच के बाद जल्द ही मामले का पर्दाफाश होगा।