औंग(फतेहपुर)। दूषित भूगर्भ जल और प्रदूषित पर्यावरण से पीडि़त गोधरौली गांव के बाशिंदों को नियमित पर्याप्त शुद्ध पानी मुहैया कराया जाए। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार के जवाब से असंतुष्ट उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शुद्ध पानी आपूर्ति करने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के जवाब के मामले को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में स्थानांतरित करने को नकार दिया। उच्च न्यायालय ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की दलील को एक सिरे से खारिज कर जनहित के मामले को पीठ की सुनवाई के लिए आवश्यक करार दिया। न्यायालय ने कहा कि हम जनहित के मामले की अनदेखी नहीं कर सकते। दूषित भूगर्भ जल और प्रदूषित पर्यावरण के मामले में ग्रामीणों को प्रशासन ने राहत नहीं दी थी।
ऐसे में ग्रामीणों ने एडवोकेट लोकेश कुमार द्विवेदी के माध्यम से उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की थी। 10 अगस्त 2023 को प्रथम सुनवाई में ही न्यायालय ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा था। ग्रामीणों को साफ पानी मुहैया कराने को आदेशित किया था। शुक्रवार को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने मामले को एनजीटी में स्थानांतरित करने की दलील दी। सरकार के वकील ने साफ पानी पहुंचने की बात कही। विरोध में ग्रामीणों के वकील ने पर्याप्त तथा नियमित पानी नहीं पहुंचने का साक्ष्य के साथ जवाब न्यायालय में पेश किया। उच्च न्यायालय में अग्रिम सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
केमिकल युक्त पानी से लोग हो रहे बीमार
फैक्टरियों का केमिकल अपशिष्ट क्षेत्र के सार्वजनिक खाली स्थानों, रास्तों, तालाब व पोखरों में फेंका गया है। इससे 300 फीट गहराई में तीन परत तक भूगर्भ जल क्रोमियम एवं फ्लोराइड युक्त होकर पीला और दूषित हो गया है। सरकारी जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। ग्रामीणों के हाथ पैर टेढ़े व मोटे हो रहे हैं। ग्राम प्रधान चंदन दिवाकर, राकेश निषाद, रामू निषाद, ननकऊ फौजी, महेश निषाद, पृथ्वी पाल पासवान, दयाराम साहू, रमेश सिंह गौतम अन्य ग्रामीणों ने गोधरौली गांव के लिए पानी की टंकी की मांग दोहराई है। राजस्व लेखपाल अभिषेक शिवहरे ने बताया ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर पानी की टंकी के लिए जगह चिह्नित कर अनुमोदन के लिए उप जिलाधिकारी को भेज दिया है।
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