बिंदकी। तहसील क्षेत्र में सोमवार की रात तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने कहर बरपा दिया। हजारों एकड़ तैयार फसलें बर्बाद होने से किसान तबाह हो गए। दो से तीन सौ ग्राम तक के गिरे ओलों से तमाम पशु पक्षियों को जान तक गंवानी पड़ी। राष्ट्रीय पक्षी मोर समेत कई घायल हुए। एसडीएम सहित राजस्व विभाग की टीमें क्षेत्र में सर्वे करने के लिए पहुंच गई है।
सोमवार को अचानक तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि शुरू हो गई। जिसमें कई गांव के किसानों की हजारों एकड़ खेतों में खड़ी तैयार गेंहू, लाही, मसूर, धनियां, चना, अरहर, जौ आदि की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई।
किसानों में हाहाकार मच गया, सुबह एसडीएम जेएन सचान ने गांव खुरमानगर, दरियापुर, बेनू, अकिलाबाद, तपनी, बनियानी सहित दर्जनों गांव का निरीक्षण किया। उन्होंने माना कि कई गांव में तो पूरी तरह से 60 से 80 प्रतिशत फसल बर्बाद हुई है।
किसान रामचरन यादव, दिनेश शुक्ला हरी केशन आदि दर्जनों किसानों ने कहा कि गत वर्षों में बर्बाद हुई। फसलों का मुआवजा नहीं मिला और इस दैवीय आपदा से अब किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
जाफरगंज संवाददाता के अनुसार गंगौली रणमस्तपुर, रामपुर, भौराजपुर, बिंदौर, मौहारी, सैमसी, गंगौली, बरवा, शुक्लनपुर सहित इस क्षेत्र के दर्जनाें गांव में ओलावृष्टि से तबाही हुई। किसानों में रामसहोदर, राजकरन सिंह, जयपाल वर्मा, बउन तिवारी, मालिक सिंह, लक्ष्मी सिंह ने बताया कि पहले से कर्ज में डूबे किसानों के परिवार आत्महत्या को मजबूर हो गए हैं।
इस क्षेत्र में कानूनगो नरेंद्र बहादुर सिंह, जीतेंद्र सिंह के नेतृत्व में पहुंची राजस्व टीम ने 60 प्रतिशत क्षति होने का अनुमान लगाया है। अमौली संवाददाता के अनुसार मवई, तारनडेरा, दपसौरा,परसेढ़ा,चांदपुर सहित क्षेत्र की हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने से किसानों के परिवारों में चूल्हे नहीं जले हैं।
इसी क्रम में देवमई ब्लाक व मलवां ब्लाक में भी ओलावृष्टि के कहर से तब हुई फसलों का मुआवजा मिला नहीं अब कर्ज में डूबे किसानों के परिवारों का कैसे भरण पोषण होगा। इस विकराल संकट से किसानों को उबारने के लिए शासन को भरपूर मदद करनी चाहिए।