फतेहपुर। नगर पालिका सिर्फ क्लोरीन मिलाकर शहर की ढाई लाख आबादी को शुद्ध पेयजल देने की गारंटी कर रहा है। शुद्ध पानी के लिए क्लोरीन के अतिरिक्त आठ मानकों को पूरा करना भी अनिवार्य है। नगर पालिका कार्यशाला के अभाव में सिर्फ नलकूपों में माइक्रो इलेक्ट्रानिक डोजर लगाकर वाटर लाइनों में सीधे क्लोरीन मिलाकर जिम्मेदारी से बच रहा है।
2008 में शहर में उल्टी-दस्त की बीमारी ने विकराल रूप धारण किया था। इसमें सिर्फ इमिलिहा बाग मोहल्ले से छह लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर के वाटर लाइनों से 16 स्थानों से पेयजल के नमूने लिए थे। परीक्षण में सभी नमूने फेल थे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में शहर का पानी दूषित करार दिया था।
डीएम के आदेश पर तत्कालीन ईओ अरुण कुमार गुप्ता ने आनन फानन सभी नलकूपों में माइक्रो इलेक्ट्रानिक डोजर लगवाया था। वर्तमान में शहर में लगने वाले नए नलकूप में इलेक्ट्रानिक डोजर अनिवार्य है। डोजर का कनेक्शन नलकूप की वाटर आपूर्ति लाइन से जुड़ा होता है। इससे बूंद-बूंद कर क्लोरीन लिक्वेट जलापूर्ति में मिलता रहता है।
इसके अलावा हार्डनेस, कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, फ्लोराइड, सल्फेट, क्लोराइड और टीडीएस की भी जांच होनी चाहिए। ये पानी में अनिवार्य तत्व हैं, लेकिन नगर पालिका के पास इसे जांचने के लिए कोई तरीका नहीं है।
अवर अभियंता जलकल विजय कुमार का कहना है कि शहर में शुद्ध पानी की आपूर्ति हो रही है। सभी नलकूपों में माइक्रो इलेक्ट्रानिक डोजर के माध्यम से क्लोरीन मिलाकर पानी की आपूर्ति की जाती है। ऐसे नल की टोंटी से निकलने वाला पानी पूरी तरह से शुद्ध है।
इनसेट
तत्व मानक (मिलीग्राम प्रति लीटर)
क्लोरीन 0.2 हार्डनेस 200 से 600 के बीच
कैल्शियम 200 अधिकतम मैग्निशियम 100 अधिकतम
आयरन 01
फ्लोराइड 1.5 सल्फेट 400
क्लोराइड 1000
टीडीएस 2000