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फतेहपुर: आजादी से अब तक रायपुर-भरसौल के मजरों को है सड़क का इंतजार

Tue, 21 Feb 2023 01:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
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फतेहपुर/किशनपुर। देश आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है। वहीं, किशनपुर और नरैनी से जुड़ने वाले ग्राम पंचायत रायपुर-भरसौल के तीन मजरे सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अमृत चखने के लिए अब तक प्यासे हैं। उनके लिए सड़क बनना ही सही मायने अमृत महोत्सव की खुशी होगी। वैसे भी 2011 की जनगणना में यह निर्धारित हुआ था कि 100 से 250 आबादी वाले मजरों व गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ा जाएगा।
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रायपुर भसरौल के रघुबर डेरा, पतरियन डेरा और बइहापुर गांव पूरब दिशा में किशनपुर और पश्चिम में नरैनी से जुड़ते हैं। जिला मुख्यालय से दूरी 55 किलोमीटर है। इन मजरों और गांव की सड़क आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बन सकी है। दोनों रास्तों की ओर लगभग डेढ़-डेढ़ किलोमीटर की सड़क कच्ची है। यहां से बारिश के चार महीने तक कोई मोटर साइकिल व चार पहिया वाहन आना-जाना नहीं कर सकता है।
ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 1984 में बइहापुर से शिव प्रसाद के डेरा तक बोल्डर डाले गए थे। लेकिन इसके बाद सड़क निर्माण नहीं किया गया। इसके विरोध में कई बार धरना प्रदर्शन भी हुए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में रघुबर डेरा और पतरियन डेरा के लोगों ने बइहापुर निवासियों के साथ वोट न करने का एलान किया। फिर अधिकारियों से आश्वासन के बाद मतदान किया। चुनाव के चार साल बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण अब तक नहीं कराया गया। डेरा और ग्रामीणों की मांग है कि जल्दी से जल्दी सड़क बने। (संवाद)
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इनसेट
फैक्ट फाइल
- पतरियन डेरा की आबादी-300

- आबादी- निषाद बाहुल्य

- रघुबर डेरा की आबादी-600

- आबादी- निषाद बाहुल्य

- बइहापुर की आबादी- 2500

- आबादी- मिश्रित

इनसेट
नरैनी की दूरी 6 किमी
नरैनी से बइहापुर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। यह मार्ग नरैनी से थूरियानी होते हुए कैनाल रोड, शिव प्रसाद का डेरा, रघुबर डेरा, पतरियन डेरा से बइहापुर तक रोड निकलता है। इसमें थूरियानी से शिव प्रसाद के डेरा तक सड़क लगभग डेढ़ साल पहले बनवाई गई। शिव प्रसाद के डेरा से रघुबर डेरा होते हुए पतरियन डेरा की दूरी लगभग 650 मीटर है। पतरियन डेरा से बइहापुर की दूरी लगभग 700 मीटर है। ये 1350 मीटर की सड़क आजादी से अब तक नहीं बनी है। रघुबर डेरा की आबादी लगभग 600 और पतरियन डेरा की आबादी लगभग 300 है। ये दोनों गांव निषाद बाहुल्य क्षेत्र हैं। वहीं, बइहापुर की आबादी लगभग ढाई हजार है। यहां मिश्रित आबादी है।
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इनसेट
किशनपुर से 10 किमी का सफर
तीन मजरों और गांव के लोगों के लिए किशनपुर से भी रास्ता है। ग्रामीणों को किशनपुर पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। किशनपुर से टुटाहवापुर होते हुए थूरियानी चौराहे तक सड़क बनाई गई, जो पूरी जर्जर हो चुकी है। इसके आगे बइहापुर से पतरियन डेरा होते हुए रघुबर डेरा तक सड़क अब तक नहीं बनी है। ये सड़क भी लगभग डेढ़ किलोमीटर की है। बइहापुर में ही एक प्राथमिक विद्यालय है। यहीं मजरे के बच्चे पढ़ने जाते हैं और माध्यमिक की पढ़ाई के लिए बगहा सरकंडी स्थित इंटर कॉलेज पर आश्रित हैं। ये सड़क बनने से स्कूल और कॉलेज का सफर भी आसान हो जाएगा।

कोट्स
फोटो03-
- पतरियन डेरा निवासी पुष्पा (52) का कहना है कि शादी के समय भी सड़क कच्ची थी और आज भी सड़क कच्ची है। बारिश में नहर तक कट जाती है। इससे आवागमन बंद हो जाता है। रिश्तेदारी में भी फर्क आने लगा है।

फोटो05-धुनुवा, रघुबर डेरा
- रघुबर डेरा निवासी धुनुवा (58) का कहना है कि सड़क नहीं होने से गांव का विकास रुक गया है। हम लोगों ने जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक फरियाद लगाई। लेकिन सड़क की आस पूरी नहीं हुई है।

फोटो-06- विजय कुमार, रघुबर डेरा
- रघुबर डेरा निवासी विजय कुमार (55) का कहना है कि नरैनी और किशनपुर दोनों ओर के रास्ते पूरी तरह से जर्जर हैं। ऐसे में हम लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। सड़क नहीं होने से कई काम प्रभावित होते हैं।
कोट्स
मैं जानकारी ले रहा हूं। अगर उनको मुख्य मार्ग से नहीं जोड़ा गया है, तो प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र सड़क बनवाई जाएगी। -अनिल कुमार शील, एक्सईएन, प्रांतीय खंड, फतेहपुर


असंपादित
खास खबर

फोटो01- पतरियन डेरा से निकलना है मुश्किल

फोटो02-रघुवर डेरा की खस्ताहाल कच्ची रोड

मुद्दा- सड़क का अमृत महोत्सव 75वें साल में रायपुर-भरसौल के मजरों को चाहिए सड़क का %%अमृत%% - आजादी के बाद से अब तक नहीं बनी सड़क

- नरैनी और किशनपुर से जुड़ते हैं ये मजरे - लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार के बाद अधिकारियों से मिला था आश्वासन

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फैक्ट फाइल

- पतरियन डेरा की आबादी-300

- आबादी- निषाद बाहुल्य

- रघुबर डेरा की आबादी-600

- आबादी- निषाद बाहुल्य

- बइहापुर की आबादी- 2500

- आबादी- मिश्रित नमित शुक्ला/ओमकार सिंह

फतेहपुर/किशनपुर। देश आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है। वहीं किशनपुर और नरैनी से जुड़ने वाले ग्राम पंचायत रायपुर-भरसौल के तीन मजरे सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अमृत चखने के लिए अब तक प्यासे हैं। उनके लिए सड़क बनना ही सही मायने अमृत महोत्सव की खुशी होगी। वैसे भी 2011 की जनगणना में यह निर्धारित हुआ था कि 100 से 250 आबादी वाले मजरों व गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ा जाएगा।

रायपुर भसरौल के रघुबर डेरा, पतरियन डेरा और बइहापुर गांव पूरब दिशा में किशनपुर और पश्चिम में नरैनी से जुड़ते हैं। जिला मुख्यालय से दूरी 55 किलोमीटर है। इन मजरों और गांव की सड़क आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बन सकी है। दोनों रास्तों की ओर लगभग डेढ़-डेढ़ किलोमीटर की सड़क कच्ची है। यहां से बारिश के चार महीने तक कोई मोटर साइकिल व चार पहिया वाहन आना-जाना नहीं कर सकता है। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 1984 में बइहापुर से शिव प्रसाद के डेरा तक बोल्डर डाले गए थे। लेकिन इसके बाद सड़क निर्माण नहीं किया गया। इसके विरोध में कई बार धरना प्रदर्शन भी हुए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में रघुबर डेरा और पतरियन डेरा के लोगों ने बइहापुर निवासियों के साथ वोट न करने का एलान किया। उस दौरान अधिकारियों से आश्वासन के बाद वोटिंग की। चुनाव के चार साल बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण अब तक नहीं कराया गया। डेरा और ग्रामीणों की मांग है कि जल्दी से जल्दी सड़क बने।



इनसेट नरैनी की दूरी 6 किमी नरैनी से बइहापुर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। नरैनी से थूरियानी होते हुए कैनाल रोड, शिव प्रसाद का डेर, रघुबर डेरा, पतरियन डेरा से बइहापुर तक रोड निकलता है। इसमें थूरियानी से शिव प्रसाद के डेरा तक सड़क लगभग डेढ़ साल पहले बनवाई गई। शिव प्रसाद के डेरा से रघुबर डेरा होते हुए पतरियन डेरा की दूरी लगभग 650 मीटर है। पतरियन डेरा से बइहापुर की दूरी लगभग 700 मीटर है। ये 1350 मीटर की सड़क आजादी से अब तक नहीं बनी है। रघुबर डेरा की आबादी लगभग 600 और पतरियन डेरा की आबादी लगभग 300 है। ये दोनों गांव निषाद बाहुल्य क्षेत्र हैं। वहीं बइहापुर की आबादी लगभग ढाई हजार है। यहां मिश्रित आबादी है।

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इनसेट

किशनपुर से 10 किमी का सफर

तीन मजरों और गांव के लोगों के लिए किशनपुर से भी रास्ता है। ग्रामीणों को किशनपुर पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। किशनपुर से टुटाहवापुर होते हुए थूरियानी चौराहे तक सड़क बनाई गई, जो पूरी जर्जर हो चुकी है। इसके आगे बइहापुर से पतरियन डेरा होते हुए रघुबर डेरा तक सड़क अब तक नहीं बनी है। ये सड़क भी लगभग डेढ़ किलोमीटर की है। बइहापुर में ही एक प्राथमिक विद्यालय है। यहीं मजरे के बच्चे पढ़ने जाते हैं और माध्यमिक की पढ़ाई के बगहा सरकण्डी स्थित इंटर कॉलेज पर आश्रित हैं। ये सड़क बनने से स्कूल और कॉलेज का सफर भी आसान हो जाएगा।



कोट्स

फोटो03- पष्पा, निवासी पतरियन डेरा

- पतरियन डेरा निवासी पुष्पा (52) का कहना है कि शादी के समय भी सड़क कच्ची है। आज भी सड़क कच्ची है। बारिश में नहर तक कट जाती है। इससे आना-जाना ही बंद हो जाता है। रिश्तेदारी में भी फर्क आने लगा है।



फोटो05-धुनुवा, रघुबर डेरा

- रघुबर डेरा निवासी धुनुवा (58) का कहना है कि सड़क नहीं होने से गांव का विकास रुक गया है। हम लोगों ने जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक फरियाद लगाई। लेकिन सड़क की आस पूरी नहीं हुई है।



फोटो-06- विजय कुमार, रघुबर डेरा

- रघुबर डेरा निवासी विजय कुमार (55) का कहना है कि नरैनी और किशनपुर दोनों ओर के रास्ते पूरी तरह से जर्जर हैं। ऐसे में हम लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। सड़क नहीं होने से कई काम प्रभावित होते हैं।
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कोट्स

मैं जानकारी ले रहा हूं। अगर उनको मुख्य मार्ग से नहीं जोड़ा गया है, तो प्रस्ताव तैयार करके सड़क बनवाई जाएगी।

अनिल कुमार शील

एक्सईएन, प्रांतीय खंड, फतेहपुर
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