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Fatehpur News: पेयजल स्रोतों में बढ़ी फ्लोराइड की मात्रा, दिव्यांग हो रहे लोग

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फतेहपुर। पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने से बिंदकी और सदर तहसील क्षेत्र खासा प्रभावित है। हैंडपंपों से पीला पानी निकल रहा है। कुछ गांवों में टैंकर से हो रही जलापूर्ति ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। कुछ क्षेत्र में डीप बोरिंग कराकर जलापूर्ति की व्यवस्था हुई, लेकिन यह जलापूर्ति अक्सर प्रभावित रहती है। ऐसे में लोगों की फ्लोराइड बाहुल्य पानी पीना मजबूरी बन गई है।
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गांवों की बड़ी आबादी दिव्यांगता का शिकार हो रही है, लेकिन प्रशासन अभी तक शुद्ध पीने के पानी के ठोस इंतजाम नहीं कर पाया है। वहीं चिह्नित क्षेत्रों में जल निगम ग्रामीण ने अब तक पानी में फ्लोराइड की मात्रा की जांच तक नहीं कराई है और पानी सप्लाई की नई कार्ययोजना तैयार कर ली है।
औंग। मलवां ब्लॉक के रामपुर, रावतपुर, गोधरौली, बनियन खेड़ा, छिवली, अभयपुर, आशापुर औंग में पानी दूषित हो गया है। अधिकांश सरकारी हैंडपंप पीला फ्लोराइड युक्त पानी उगल रहे हैं। कमोबेश सबमर्सिबल से भी पीला दूषित पानी निकल रहा है। धीरे-धीरे 28 गांवों की 20 किमी क्षेत्र में बसी करीब 20 हजार की आबादी को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। गोधरौली गांव में 300 परिवारों की पांच हजार आबादी के लिए तहसील प्रशासन ने एक टैंकर मुहैया कराया है।
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औंग गांव के 300 परिवारों को जलापूर्ति करने वाली पानी की टंकी एक माह से बंद है। जेई उज्जवल कुमार ने बताया टंकी में पांच हॉर्सपावर की मोटर डाली गई है। ग्रामीणों के मुताबिक मोटर आए दिन खराब रहती है। छिवली गांव की पानी की टंकी की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से 2000 की आबादी फ्लोराइड युक्त पीला पानी पी रही है।
हुसैनगंज। डेढ़ दशक पूर्व चौहट्टा गांव के जलस्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ी थी। उस दौरान दो मिलीग्राम से अधिक मात्रा मिली थी। दूषित पानी पीने से लोगों के दांत और हाथ पैर टेढ़े हो चुके हैं। भिटौरा ब्लाक के चौहट्टा में वर्ष 2007 में गांव के पेयजल में फ्लोराइड मात्रा अधिक होने की पुष्टि हुई। एक हजार आबादी वाले चौहट्टा में प्रशासन ने सभी हैंडपंप सील कर इनके पानी का प्रयोग करने पर रोक लगाई। कुछ हैंडपंपों में फिल्टर लगाकर पानी शुद्ध करने की व्यवस्था की। तीन वर्ष तक प्रशासन ने टैंकरों के माध्यम से पड़ोसी गांवों से पेयजल उपलब्ध कराया।
2010 में पानी की टंकी का निर्माण कराकर गांव में पानी के सप्लाई शुरू की। जलापूर्ति शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। अब डीप बोरिंग करके जलापूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। वहीं जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता सौमित्र श्रीवास्तव का कहना है कि जिले में कहीं भी फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा नहीं है।
फ्लोराइड से सबसे अधिक श्रीपाल पासवान का परिवार प्रभावित है। परिवार के सभी पांच सदस्य दिव्यांग हो चुके हैं। परिजनों का आरोप है कि एक माह के अंदर श्रीपाल की पत्नी मैकी तथा पुत्री राजरानी की मौत हो चुकी है। पुत्र पवन तथा जय बहादुर के पैर टेढ़े हैं। प्रदूषित जल के सेवन से विजय पाल, मोहन, राज कुमार का परिवार सहित लोग प्रभावित हैं।
चौहट्टा में पानी सप्लाई के लिए कार्य जारी है। थर्ड लेयर पर बोरिंग की जा रही है। कंप्रेशर लगने के बाद ही पानी की जांच की जाएगी। अभी फ्लोराइड की मात्रा की जानकारी नहीं है। फर्स्ट लेयर में पानी प्रदूषित होता है, तभी गहरी बोरिंग की जा रही है।
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-अरविंद कुमार, सहायक अभियंता, मैकेनिकल, जल निगम, ग्रामीण
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