-बिना पढ़े घर बैठे डिग्री लेने के लिए छात्र-छात्राएं वित्तविहीन में लेते हैं प्रवेश
-परीक्षा में सख्ती के कारण एडेड, राजकीय की 50 प्रतिशत भी नहीं भर पाती सीटें
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। शहर में उच्च शिक्षा का ग्राफ गिरता जा रहा है। युवाओं में बिना कॉलेज गए डिग्री प्राप्त करने की होड़ सी मची है। यही कारण है कि राजकीय और वित्तपोषित मिलाकर दोनों महाविद्यालयों की स्थिति दयनीय हो रही है। एक दशक से प्रवेश स्थिति 50 प्रतिशत से अधिक नहीं पहुंचती। इसके पीछे निजी शिक्षण संस्थाओं में बिना स्कूल आए डिग्री देने की व्यवस्था माना जा रही है।
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फोटो-08-डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महिला महाविद्यालय। संवाद
शहर के डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महिला महाविद्यालय में बीए में 500 सीटें हैं, जिनके सापेक्ष पिछले सत्र में 200 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। बीएससी में 80 सीटों के सापेक्ष 70 छात्राओं ने प्रवेश लिया था। इस तरह से सीटों के सापेक्ष महाविद्यालय में करीब 50 प्रतिशत सीटें पूरे सत्र खाली रहीं।
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फोटो-09-महात्मा गांधी महाविद्यालय शांतिनगर। संवाद
महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय शांतिनगर में प्रवेश की स्थिति तो बहुत ही दयनीय है। बीए की 1080 सीटों के सापेक्ष सिर्फ 150 सीटें भर पाई थीं। बीकॉम की 240 सीटों के सापेक्ष कुल 15 छात्रों ने ही प्रवेश लिया था। खास बात तो यह है कि प्राइवेट डिग्री कालेजों की शत प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। न्यूनतम फीस वाले विद्यालय एक-एक प्रवेशार्थी को तरसते हैं।
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सीटें न भरने का कारण
जिले में 60 वित्तविहीन डिग्री काॅलेज हैं। इनमें पूरे साल क्लास नहीं चलती हैं। परीक्षा के समय छात्र-छात्राओं को कॉलेज आना होता है। इसके साथ पास होने की गारंटी है। इसके विपरीत राजकीय और एडेड डिग्री कालेजों में बराबर क्लास चलती हैं। कम उपस्थिति होने पर छात्र को परीक्षा से वंचित कर दिया जाता है। इतना ही नहीं नकल करते पकड़े जाने पर अपने छात्र के खिलाफ कार्यवाही होती है। यही कारण है कि छात्र-छात्राएं वित्तविहीन डिग्री कालेज में ही दाखिला लेते हैं। यही कारण है कि जिले में उच्च शिक्षा मजाक बनी हुई है।
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कैसे हो निराकरण:-
एडेड विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण हो। उपस्थिति कम होने पर कार्रवाई की जाए। स्वकेंद्र परीक्षा का लाभ कतई न दिया जाए। परीक्षा केंद्र एडेड और राजकीय महाविद्यालय ही बनाए जाएं। नकल से वंचित होने पर छात्र-छात्राएं एडेड और राजकीय डिग्री कालेजों में दाखिला लेना प्रारंभ कर देंगे।
बयान:-
वित्तविहीन महाविद्यालयों ने उच्च शिक्षा को निचले पायदान में खड़ा कर दिया। यह संस्थाएं बिना स्कूल आए डिग्री दे रही हैं। ऐसे में सरकारी संस्थाओं में कोई प्रवेश लेना नहीं चाहता, क्योंकि इन विद्यालयों में बच्चा पढ़ाई के बल पर ही सफलता पा सकता है। अन्य किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिल सकती।
डॉ. अपर्णा मिश्रा, प्राचार्य डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महिला महाविद्यालय फतेहपुर।