फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehpur News: फैक्टरी प्रबंधन नहीं दिखा सका श्रमिकों का लेखाजोखा

Wed, 17 Jan 2024 01:59 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहपुर। फैक्टरी प्रबंधन प्रारंभिक जांच में मजदूरों का लेखा-जोखा नहीं दिखा सका है। प्रबंधन में घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल दिखा। श्रमिकों का कोई ब्योरा तक नहीं मिला। दमकल विभाग से भी एनओसी नहीं जारी है। घटना के बाद संबंधित विभाग जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजेगें।
विज्ञापन

सौंरा औद्योगिक क्षेत्र में बैटरी स्क्रैप फैक्टरी हादसे के बाद अधिकारियों की नजर में आई है। फैक्टरी में सोमवार रात मिर्जापुर जिला लालगंज थाना क्षेत्र के तेंदुई निवासी रामधनी का पुत्र शिवकुमार उर्फ लाला (24) और प्रयागराज सोरांव थाने के बड़ोखर निवासी अच्छेलाल का पुत्र अर्जुन उर्फ गोरे (23) की अलाव के धुएं से दम घुटकर मौत हुई है। तेंदुई गांव के ओमप्रकाश और कमलेश की हालत गंभीर बनी है। फैक्टरी करीब डेढ़ साल से संचालित होना सामने आया है। गेट पर फैक्टरी की फर्म का नाम तक नहीं लिखा है।
श्रम परिवर्तन अधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि फैक्टरी प्रबंधक से श्रमिकों के पंजीकरण समेत अन्य जानकारियां मांगी गई। वह कोई कागजात मुहैया नहीं करा सके। सभी फैक्टरी प्रबंधकों को उनके यहां काम करने वाले श्रमिकों की सूचना कार्यालय में दी जानी चाहिए। प्रबंध तंत्र की ओर से सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि इसका सारा लेखाजोखा प्रयागराज स्थित संबंधित कार्यालय में होता है। फैक्टरी प्रबंध तंत्र के लोग कुछ ही देर तक मौके पर मौजूद रहे। उधर, सीएफओ उमेश गौतम ने बताया कि फैक्टरी प्रशासन ने एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया है। फैक्टरी परिसर में आग लगने पर बुझाने के भी इंतजाम भी नहीं है। कमरे में सोते समय काल के गाल में समाने वाले शिवकुमार और अर्जुन करीब 20 दिन पहले काम पर आए थे। उनके साथी श्रमिकों ने बताया कि वह नीचे सोते थे। इसी वजह से फैक्टरी के मुख्य गेट की चाबी उनके पास ही रहती थी।
विज्ञापन



कमरे में पानी होता तो बचती जान
सीएफओ उमेश गौतम ने बताया कि कमरे में पानी रखा होता तो आक्सीजन खत्म नहीं होती, इससे श्रमिकों की जान बच सकती थी। पानी से आक्सीजन बनती रहती। धुएं से कार्बन मोनो आक्साइड और कार्बन डाई आक्साइड सोते समय फेफड़े तक पहुंचने पर व्यक्ति अचेत हो जाता है। आक्सीजन की मात्रा खत्म होते ही दम घुट जाता है। इस तरह का एक हादसा अमरोहा में हो चुका है।


10 फीट का कमरा श्रमिकों का कब्रगाह बना

श्रमिकों के सोने वाला कमरा करीब कमरे 10 फीट लंबा-चौड़ा था। कमरा दो श्रमिकों का कब्रगाह बन गया। श्रमिक कमरे में रात को थककर सो गए थे। इसी वजह से उन पर धुएं का असर भी नहीं हो सका। कमरा खोले जाने पर शिवकुमार और अर्जुन करीब दो फीट की दूरी पर मृत पड़े थे। उनके होंठ सूखे और मुंह खुला था। फैक्टरी दो शिफ्ट में चलती है। पहली शिफ्ट सुबह नौ बजे शाम चार बजे व दूसरी शिफ्ट शाम चार बजे से रात 12 बजे तक चलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें