फतेहपुर। सामूहिक धर्मांतरण मामले में सैम हिग्गिनबाटम एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंस यूनिवर्सिटी, नैनी (शुआट्स) के खिलाफ गंभीर आरोप लगा है। हरिहरगंज सामूहिक धर्मांतरण प्रकरण में एक और गवाह सामने आया है। स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश हुए एक पूर्व छात्र ने फोटो दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं। पूर्व छात्र का दावा है कि उसने 22 सितंबर 2012 को सेमिनार के दौरान कई लोगों का धर्मांतरण शुआट्स अधिकारियों के जरिए कराया जाते देखा है।
प्रयागराज के रहने वाले दिनेश शुक्ला नैनी स्थित शुआट्स में 2012 से 2014 के बीच मास कम्यूनिकेशन का कोर्स कर रहे थे। उन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 22 सितंबर 2012 में शुआट्स का 19वां सेमिनार हुआ था। सेमिनार में सेमेस्टर का प्रमाणपत्र मिला था। उस प्रमाणपत्र में यूएसए की एनआरबी संस्था के सीईओ डॉ. फ्रेंक राइट, एनआरबी के वीसी डॉ. राबिन रोनाल्ड, फिनलैंड के डॉ. हल्लू हैक और शुआट्स से संचालित निजी चैनल सुख संदेश के मिस्टर नेहरू डेयरिन के हस्ताक्षर थे।
जाहिर होता है कि धर्मांतरण संबंधी फंडिंग में इनसे सहयोग लिया गया होगा। इसी दिन यूनिवर्सिटी परिसर में संचालित यीशु दरबार में लोगों का धर्मांतरण कराया गया है। इसके फोटो सुख संदेश में प्रसारित किए गए थे। यह फोटो कुछ दिन पहले सुख संदेश की वेबसाइट से हटा दिए गए हैं। यीशु दरबार में एक कुंड बना है, जहां धर्मांतरण करने आने वाले लोगों को चंगाई सभा के बाद कुंड में डुबकी लगवाई गई थी।
इस दौरान शुआट्स के रजिस्टार रॉबिन एल प्रसाद, तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सरबजीज हरबर्ट, डेविड फिल, पीआरओ डा. रमाकांत दुबे शामिल थे। यीशु दरबार में शुआट्स के वीसी आरबी लाल और उनकी पत्नी सुधा लाल, भाई विनोद बी लाल आजीवन सदस्य हैं। यह लोग ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शुआट्स की बसों से धर्मांतरण के लिए लाते थे।
शासन ने शुआट्स के नाम पर 500 बीघा जमीन ब्रिटिश काल में दी थी। संस्था में आरबी लाल और उसके परिवार का करीब 25 साल से कब्जा है। उन्होंने यीशु दरबार में सारी संपत्ति 2003 में अवैध तरीके से ट्रांसफर की थी, जबकि यीशु दरबार संस्था का पंजीकरण 2009 में कराया गया है। बाद में काफी जमीन शुआट्स को वापस की गई। धोखाधड़ी कर जमीन यीशु दरबार के नाम कराने की शिकायत बीजेपी नेता दिवाकर त्रिपाठी ने 14 अप्रैल 2017 को की थी।
तत्कालीन करछना एसडीएम राजा गणपति ने शिकायत की जांच में पुष्टि की थी।
स्वतंत्र गवाह के रूप में पेश होने के बाद उसे इन लोगों से जान और फर्जी मुकदमे में फंसाने का खतरा भी है। उसने शुआट्स को अल्पसंख्यक सूची में न होने, कैंपस में चर्च, यीशु दरबार में रजिस्ट्रेशन समेत 32 बिंदुओं पर सवाल भी पूछे हैं। शुआट्स के पीआरओ डा. रमाकांत दुबे ने बताया कि मास कम्युनिकेशन कोर्स के बाद दिनेश शुक्ला सहायक प्रवक्ता के पद की मांग कर रहे थे। आरोप निराधार हैं। शुआट्स से बर्खास्त डॉ. आईजेक फ्रैंक के दिनेश सहयोगी हैं।
.......................
220 पेज का पुलिस को सौंपा दस्तावेज
दिनेश शुक्ला ने पुलिस को कई फोटो के साथ 220 पेज के दस्तावेज सौंपे हैं। पुलिस दस्तावेजों की छानबीन में जुटी है। जांच में तमाम अहम पुलिस को साक्ष्य मिल सकते हैं। साक्ष्यों के आधार पर शुआट्स के करीब 20 सदस्य पुलिस जांच के घेरे में आए हैं। पुलिस प्रमुख लोगों के नाम को जल्द प्रकाश में ला सकती है।
------
धर्मांतरण के साक्ष्य जुटाने पुलिस कानपुर गई
धर्मांतरण के साक्ष्य जुटाने के लिए जिले की पुलिस कानपुर गई है। मामले में एक आरोपी कानपुर के अर्मापुर का रहने वाला है। उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। हालांकि इस मामले से जुड़े बिंदकी फरीदपुर के रहने वाले भानू प्रकाश की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है। भानू समेत तीन नामजद आरोपी फरार चल रहे हैं।
स्वतंत्र गवाह दिनेश शुक्ला। संवाद- फोटो : FATEHPUR