शहर के बहुचर्चित नशेमन होटल कांड में सात साल बाद
कोर्ट का फैसला आ ही गया। सात आरोपियों में चार दोषमुक्त हो गए जबकि तीन को
उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इन्हें तीस-तीस हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का
भी आदेश हुआ है। बता दें कि इस कांड में दाल लदे ट्रक को लूटकर उसके चालक,
क्लीनर व मालिक की हत्या कर दी गई थी। शनिवार को कोर्ट नंबर आठ के अपर सत्र
न्यायाधीश नित्यानंद श्रीनेत ने सजा सुनाई।
यह घटना बीस जुलाई 2009 की
है। फर्रुखाबाद जिले के उधमपुर गोड़ा निवासी वादी(मृतक के भाई) रामू सिंह
सिसौदिया ने ललौली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका भाई ट्रक क्लीनर
सर्वेश सिंह, चचेरा भाई ट्रक चालक गोविंद सिंह और ट्रक मालिक इटावा निवासी
अनीस 19 जुलाई 2009 को दस टायरा ट्रक में 32 टन मटर की दाल लादकर डबरा,
एमपी से बनारस के लिए निकले थे।
20 जुलाई को शाम करीब छह बजे आखिरी बार
दोनों भाइयों ने चौडगरा पहुंचकर मोबाइल से बात की थी, इसके बाद संपर्क नहीं
हुआ। 21 जुलाई को सूचना मिली कि उसके दोनों भाइयों का शव ललौली थाना
क्षेत्र के बस्तापुर व जमेनी गांव में सड़क के किनारे मिला है। जबकि ट्रक
मालिक का शव हुसेनगंज थाना क्षेत्र में मिला और ट्रक गायब था।
पुलिस ने
छानबीन की तो उन्हें नशेमन होटल के एक हिस्से में दाल डंप मिली। इसी
विवेचना के आधार पर पुलिस ने लाखन मिश्रा, सोनू कठेरिया, हरेंद्र तिवारी,
रवींद्र कटियार, राकेश, अनिल सिंह, भानु प्रताप सिंह को आरोपी बनाया। फिर
साक्ष्य इकट्ठा कर इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
शनिवार को अपर सत्र
न्यायाधीश नित्यानंद श्रीनेत ने मामले की अंतिम सुनवाई की। उन्होंने
अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे की ओर से पेश किए गए सबूत और
दलीलों को सुन कर लाखन मिश्रा निवासी इटावा, सोनू कठेरिया औरैया और शहर के
आवास विकास निवासी भानु प्रताप सिंह को आजीवन कारावास और प्रत्येक को
तीस-तीस हजार रुपये अर्थ दंड की सुजा सुनाई है। इसके अलावा हरेंद्र तिवारी,
रवींद्र कटियार, राकेश व अनिल सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर
दिया गया।