फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहाने उतरे छह बच्चों में तीन डूबे, कानपुर रेफर

Mon, 16 May 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
विज्ञापन
परिवार के साथ शिवांश और प्रभात - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
तालाब में नहाने के गए गांव के छह बच्चों में तीन की गहराई में डूब जाने से हालत बिगड़ गई। जिला अस्पताल के डाक्टराें ने तीनों को गंभीर हालत में कानपुर रेफर किया है। गांव में घटना से हड़कंप मचा है। यह घटना थरियांव थाना क्षेत्र के रमवां गांव की है।
विज्ञापन


हंसवा गांव निवासी महेंद्र तिवारी उर्फ अतुल की बेटी अंशिका (10), आर्या (8) अनिल का बेटा हिमांशु (10) सुनील तिवारी के बेटे शिवांश (12), प्रभात (10) हैं। सदर कोतवाली क्षेत्र  खंभापुर निवासी प्रमोद का बेटा अनुराग द्विवेदी उर्फ रामजी (15) अपने ननिहाल शनिवार को रमवां पहुंचा था। सभी बच्चे रविवार को गांव से कुछ दूरी पर पक्का तालाब में नहाने गए थे।

तालाब में आर्या, हिमांशु, अनुराग और अंशिका उतर गए। वहीं प्रभात और शिवांश बाहर खड़े थे। कुछ देर बाद अंशिका तालाब किनारे से ही वापस लौट आई। बाकी तीनों आर्या, हिमांशू, अनुराग नहाते नहाते गहराई में चले गए। कुछ मिनट तक बाहर नहीं आए। तभी राहगीरों से बच्चाें ने मदद मांगी। गहराई से तीनों को बाहर निकाला गया। डूबने की फैली खबर पर परिजन भी पहुंच गए। तीनों को बेहोशी हालत में और कीचड़ से लिपटे थे। जिला अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद कानपुर रेफर किया गया।
विज्ञापन


 रमवां गांव में तीन बच्चों की खतरे में पड़ी जान को निस्वार्थ भाव से बचाने की सफल कोशिश करने वाले दो राहगीरों के जज्बा सलाम के काबिल है। वे नौनिहालों की जान खतरे में पड़ी देखकर तालाब में कूद गए और जान बचाने का काम किया।  ऊदल और रामदीन थरियांव थाना क्षेत्र के शहजादेपुर गांव निवासी है।

ग्रामीणों ने बताया कि एकारी गांव का भी एक ग्रामीण बच्चों का बचाने के लिए सबसे पहले पहुंचा था। शहजादेपुर गांव के दोनों ग्रामीण किसी काम से शहर आ रहे थे। तालाब किनारे शिवांश, प्रभात और अंशिका को रोते बिलखते देखा। उनसे पूछताछ में तीन बच्चों के डूबे होने का पता लगा। बगैर किसी संकोच के तालाब में कूदकर जान बचाने का काम किया। इनकी वजह से तीनों बच्चों की समय रहते जान बच सकी। हालांकि कानपुर हैलट में तीनों भर्ती हैं।  

बीना देवी अपने बेटे अनुराग उर्फ रामजी को लेकर अपने मायके शनिवार को रमवां पहुंची थी। दूसरे दिन रविवार को उसके बेटे के साथ ऐसी घटना हो गई। घटना के बाद ननिहाल पक्ष के लोगों में हड़कंप मचा रहा है। वे लोग कहते रहे कि भगवान ने कलंक लगने से बचा लिया नहीं तो सारी जिंदगी बेटी की ससुराल के लोग कोसते रहते।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें