पुरानी रंजिश में गोलियां बरसाकर छह लोगों की हत्या के मामले में बुधवार अदालत ने सुनवाई की। 15 अभियुक्तों में तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि आठ को दोषमुक्त करार दिया गया। इसके अलावा एक अभियुक्त अभी भी फरार है। वहीं तीन अभियुक्तों की मौत हो चुकी है।
यह घटना 15 अक्टूबर 1996 को हुसैनगंज थाना क्षेत्र के भिटौरा गंगाघाट के पास की है। वादी सिविल लाइंस निवासी रतीभान सिंह ने हुसैनगंज थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह और उसके लड़के पुत्तन सिंह, सोनू गंगा स्नान करने भिटौरा गए थे। उनके साथ कयूम, इकबाल, अशोक, पप्पू उर्फ राजेंद्र, फकीरे भी थे। वह शौचक्रिया से लौट रहे थे, तभी वहां मौजूद बाकरगंज निवासी राम सनेही उर्फ पुजारी ने शोर मचाया और अपने साथियों के साथ अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस घटना में इसरार, इकबाल, सोनू, कयूम, अशोक और फकीरे की मौत हो गई थी।
तहरीर मिलने के बाद हुसैनगंज पुलिस ने रामसनेही पाठक उर्फ पुजारी, अंगद सिंह मवई, अनूप सिंह, बब्बी उर्फ राघवेंद्र सिंह मवई, रामलोचन सिंह मवई, शिववीर सिंह मवई, प्रेम नारायण, वीरेंद्र शुक्ला, रजोले उर्फ ज्ञानेंद्र कुमार, राजू उर्फ जितेंद्र, ननकऊ भिटौरा, नन्हें सिंह कैडे़पुर, शिव दास, मेवालाल, तुलसीदास के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एडीजे कोर्ट नंबर आठ नित्यानंद श्रीनेत ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। सहायक शासकीय अधिवक्ता राम सिंह यादव और धर्मेंद्र उत्तम ने आरोपियों के खिलाफ दलीलें और सबूत पेश किए। इस अदालत ने राम लोचन सिंह, शिवबीर और बब्बी सिंह उर्फ राघवेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं प्रेम नारायण, रजोले, ननकऊ, शिवदास, तुलसीदास, राजू, नन्हें, वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने पर दोषमुक्त कर दिया है। अधिवक्ता ने बताया राम सनेही पाठक, अंगद सिंह और मेवालाल की मौत हो चुकी है। वहीं एक आरोपी अनूप सिंह फरार चल रहा है।