स्कूल बस की टक्कर से छह साल के छात्र की मौत हो गई, जबकि सगी बहनें बाल-बाल बच गईं। हादसे के बाद चालक वाहन समेत भाग निकला। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई के बगैर अंतिम संस्कार कर दिया।
शहर के गंगानगर मोहल्ला निवासी अमित द्विवेदी का बेटा अंश (6) यू केजी का छात्र था। वह गुरुवार की सुबह अपनी बड़ी बहनों अंशिका (10) कक्षा चार और अर्पिता (7) कक्षा एक के साथ सरस्वती बाल मंदिर स्कूल जा रहा था। स्कूल के मोड़ पर पीछे से आई तेज रफ्तार स्कूली बस ने टक्कर मार दी। इससे अंश उछलकर दूर जा गिरा। साथ जा रही बहनें चीख पड़ीं। हादसा होता देख परिजन घर से दौड़कर पहुंचे।
बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डाक्टरों ने जांच कर मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव को मार्च्युरी में रखवाने को कहा, लेकिन परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे। इस वजह से नोकझोंक हुई। वे शव लेकर घर लौट आए। भिटौरा घाट पर शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। पिता अमित ने बताया हम लोग मूलरूप से ललौली थाने के जजरहा गांव निवासी हैं। कई साल से गंगानगर में रहते हैं। कोतवाल सुनील कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों की ओर से कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर ही कार्रवाई हो सकती है।
बस की रफ्तार देख हैरत में पड़े लोग
नगर इलाके में गुरुवार को बच्चे को टक्कर मार भागने वाली बस की रफ्तार गली में देखकर लोग हैरत में पड़ गए थे। उसमें बैठे बच्चे भी दहशत में दिखे। रेलबाजार रोड से गंगानगर मोहल्ले की गली के रास्ते से एक शार्टकट बांदा-टांडा हाईवे मार्ग पर निकलता है। रेलबाजार रोड से घुसते ही कुछ कदम पर अमित द्विवेदी का मकान है। मकान से महज 20 कदम पर उनके बच्चों के स्कूल का मोड़ है। इसी वजह से परिवार के लोग भी बेफिक्र रहते थे।
मां कल्पना ने सुबह बच्चों के लिए नाश्ता और टिफिन तैयार कर उन्हें गेट तक छोड़ दिया था। बीस कदम स्कूल के मोड़ तक की दूरी बच्चों को तय करनी थी। उससे पहले ही काल बनकर स्कूली बस आ गई। इलाकाई लोग चालक की लापरवाही से हादसा मान रहे हैं। रेलबाजार मोड़ से गली में बस घुसी थी। ऐसे में उसकी गति धीमी होनी चाहिए थी, लेकिन बस तेज रफ्तार में थी। हादसे के बाद भागने के चक्कर में बच्चों से भरी बस को चालक ने और तेज भगाया। यह देखकर लोग अवाक रह गए। उसे रोकने के लिए कुछ लोगों ने पीछा भी किया, लेकिन भाग निकला। ईएमओ डाक्टर एके सचान ने बताया कि बच्चे के सिर में काले रंग का चोट निशान था। दिमाग में अंदरूनी चोट लगने से हेड इंर्जरी हुई है।
परिवार का इकलौता बेटा था अंश
अंश परिवार का इकलौता बेटा था। उससे बड़ी दो बहनें थी। वह परिवार का लाडला था। बेटे की मौत से मां कल्पना सुध-बुध खो बैठी। घर में महिलाओं का तांता लगा रहा। दोनों बहनें मां को बेहाल देखकर उनसे लिपटकर रोती दिखाई दीं। पूरे इलाके के लोगों की घर में भीड़ लगी रही। सभी की जुबान में अंश के चर्चे रहे। उधर, स्कूल में बच्चों की छुट्टी कर दी गई। प्रधानाचार्य लक्ष्मी शंकर समेत कई टीचर अंध के अंतिम संस्कार में पहुंचे।
पुलिस को शिकायत का इंतजार
मासूम की जान ले लेने वाले बस चालक पर कार्रवाई के लिए पुलिस को पीड़ित पक्ष की तहरीर का इंतजार है। परिवार ने यह कहते हुए तहरीर नहीं दी कि उनका इकलौता लाल तो अब इस दुनिया से चला गया, अब कार्रवाई करके क्या होगा। इलाकाई लोगों का कहना है कि पुलिस को स्वत: संज्ञान लेकर चालक पर कार्रवाई करनी चाहिए। न पकड़े जाने पर बस चालक को फिर से सड़क पर मनमानी करने की छूट मिल जाएगी।