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बढ़ते गए कब्जे, सिकुड़ते गए तालाब

Thu, 30 Mar 2017 12:42 AM IST
अमर उजाला फतेहपुर
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बकेवर के तालाब पर अतिक्रमण का नजारा - फोटो : अमर उजाला
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जिले के ज्यादातर तालाबों पर कब्जा है। हालात यह है कि कई तालाबों का स्वरूप या तो मिट गया है अथवा मिटने के कगार पर है। किसी तालाब पर मकान बना लिए गए हैं तो किसी पर दुकानें बन चुकी हैं। योगी सरकार के तालाबाें को कब्जे से मुक्त कराने के फरमान के बाद डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने ऐसे तालाबों को पुराने स्वरूप पर लाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा संभव हो सकेगा। इसकी वजह प्रशासन स्तर पर अभी तक की गई कार्रवाई है। कब्जाधारकों पर किए गए जुर्माने की राशि न तो सरकारी कोष मेें पहुंच सकी है और न आरसी जारी करने के बाद कार्रवाई ही आगे बढ़ी है।
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आलम यह है कि प्रशासन की अनदेखी से तालाबों पर कब्जे बढ़ते गए और तालाब सिकुड़ते चले गए। कुछ इलाकों के तालाबों की हकीकत बयां करती एक रिपोर्ट। तालाब में बांधे जा रहे मवेशी अमौली। क्षेत्र के बुढ़वा गांव में 13 बीघा का तालाब था। मौजूदा समय में इसका स्वरूप घटकर चार बीघा रह गया है। इस तालाब पर अब पेड़ लगे हैं। सर्वराकार जय नारायन मिश्र ने कब्जाधारकों के खिलाफ मुकदमा लिखाया लेकिन कब्जा जस का तस है। अमौली ब्लाक मुख्यालय से सटे 47 बीघे के तालाब पर कब्जा बढ़ता जा रहा है, जिससे यह लगातार सिकुड़ता जा रहा है। बस्ती की तरफ लोग घर बना रहे हैं दूसरी तरफ दुकानें बना ली गई हैं।


सठिगंवा के बड़े तालाब को अतिक्रमण से पाटने का खेल जारी है। इस तालाब पर अतिक्रमणकारी अपने अपने मवेशी बांध रहे हैं। नेऊरी जलालपुर गांव के तीन तालाबों का भी कमोबेश यही हाल है। इनका आधा-आधा हिस्सा कब्जे में विलुप्त हो चुका है। जो बचा है उस पर भी कब्जा का खेल जारी है। तालाब में सज रही बाजार बकेवर। बकेवर की मुख्य बाजार तालाब में लगती है। इस पर पक्की दुकानें बना ली गई हैं। मकान भी बन गए हैं। इस पर 20 मकान बन चुके हैं। यह तालाब करीब चार बीघा था जो महज दो बीघा ही बचा होगा। तालाब में अतिक्रमण होने से मवेशियों को गर्मी में पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है तो बरसात में जलभराव का संकट झेलना पड़ रहा है। देवमई ब्लाक के बकेवर, हरदासपुर, सरायं बकेवर, रसूलपुर आदि गांवों में तालाबाें का अस्तित्व खतरे मेें हैं। यह तालाब धीरे धीरे पटते जा रहे हैं। आरसी का भी खौफ नहीं औंग। कस्बे में साढ़े चार बीघे का तालाब इस वक्त सिमट कर 15 बिस्वा रह गया है। इस पर मकान खड़े हो गए हैं। हालांकि राजस्व विभाग ने 12 कब्जेदारों के खिलाफ पिछले साल कार्रवाई की प्रक्रिया चालू की थी, जिसमेें किसी कब्जेदार पर पांच हजार तो किसी पर 34 हजार रुपये का जुर्माना किया गया था। जुर्माना जमा न करने पर राजस्व विभाग ने इनके खिलाफ आरसी जारी की थी। अमीन वसूली को इनके पास तो पहुंचा लेकिन न तो कब्जा छूटा और न ही वसूली ही हो सकी है। गोधरौली में साढ़े सात बीघा का तालाब था। अब यह एक बीघा पर सिमट गया है। लघु सिंचाई विभाग ने जल संचयन के लिए खुदाई करा कर इसे पुराने स्वरूप पर लाने का काम कर दिया है। इसी प्रकार 11 बीघा रकबा का एक और तालाब कब्जे से घिरता जा रहा है। इस पर 42 मकान खड़े हो चुके हैं। नई सरकार की सख्ती के बाद लेखपाल कैलाश नाथ शुक्ल ने इसे कब्जामुक्त कराने की दिशा में प्रयास जारी कर दिया है। यह दीगर है कि अतिक्रमणकारियों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।
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