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जिसे पुलिस ने माना मरा, वह निकला जिंदा

Sun, 10 Jan 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
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दस साल तक पुलिस की नाक में दम करने वाला दुर्दांत अपराधी राधेश्याम जिंदा निकला। जिले से लापता होने के बाद पुलिस अपनी पड़ताल में मरा मान चुप बैठ गई थी। उसके कान तब खुले जब शनिवार को एसटीएफ ने राधेश्याम को इलाहाबाद के चौफटका इलाके में पिस्टल के साथ धर दबोचा। फतेहपुर जिले में इस पर करीब आधा दर्जन थानों में 15 मामले दर्ज हैं। जिनमें दस हत्या, दो हत्या के प्रयास, डकैती, फिरौती वसूलने के मामले शामिल हैं। उन दिनों राधेश्याम पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
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जिले की मोस्टवांटेड सूची में नंबर एक राधेश्याम मौर्या और दो पर सीताराम मौर्या आते हैं। दोनों भाई सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के ओरम्हा गांव के रहने वाले हैं। वर्ष 1998 में कुर्की के बाद से उनके घरों में ताले लटकते रहते हैं।

लखनऊ एसटीएफ एसपी अमित पाठक की टीम ने राधेश्याम मौर्या को शनिवार सुबह पकड़ा। यह चौफटका गढ़वा से कौशांबी की ओर जा रहा था। इसके पास से एक बाइक, 32 बोर की पिस्टल और 12 हजार की नकदी बरामद हुई है।
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माना जा रहा है कि यह इलाहाबाद से कौशांबी किसी घटना को अंजाम देने जा रहा था। कई दिनों से इलाहाबाद में होने की लोके शन पर टीम बदमाश के पीछे लगी थी। करीब तीन साल पहले फतेहपुर पुलिस और जांच एजेंसियों ने दोनों भाइयों को मृत मान लिया था।

पुलिसकर्मी की हत्या के बाद हुआ था लापता
जिले के असोथर थानाक्षेत्र के टीकर गांव के पास 22 अक्तूबर 1997 को पुलिस मुठभेड़ हुई थी। इसमें राधेश्याम और उसके भाई सीताराम को गैंग समेत घेर लिया गया था। बचने के लिए राधेश्याम ने कांस्टेबल रामसेवक को गोली मार दी और भाग निकला। फिर बाद में कांस्टेबल की मौत हो गई।

लौटकर पुलिस टीम ने थाने में इस गैंग के खिलाफ हत्या, दलित एक्ट समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। घटनाक्रम यूं था कि तत्कालीन असोथर एसओ श्यामनारायण, एसआई भिखारी लाल, सिपाही अनुरुद्ध और कांस्टेबल रामसेवक ट्रैक्टर से दबिश डालने गए थे। यह लोग भोर में वापस थाने आ रहे थे। तभी टीकर भट्ठे के पास गैंग से मुठभेड़ हुई थी। इस घटना के बाद से पूरा गैंग जिला छोड़कर फरार हो गया था।

परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहा
असोथर थाना क्षेत्र में 1997 में पुलिस कर्मी की हत्या के बाद राधेश्याम और सीताराम गैंग लापता हो गया था। इसके बाद से पुलिस को इनकी कोई खबर नहीं मिली थी। एसटीएफ की पूछताछ में राधेश्याम ने बताया है कि वह लोग छत्तीसगढ़ प्रांत चले गए थे। वहां पर विलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और अंबिकापुर में राजाराम के नाम से रहता था। जीविका चलाने के लिए गांवों में झूले का व्यवसाय करता था। वह अपने ठिकाने पुलिस के डर से बदलते रहे हैं।

तलाश में जिले की पुलिस ने फूंक दिए लाखों रुपये
कई बार जिले से दुर्दांत भाइयों को खोजने के लिए एसओजी और थानों की टीमों ने गैर प्रांतों की खाक छानने जा चुकी हैं। इनकी तलाश पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में पुलिस गई थी। इनकी खोजबीन में पुलिस विभाग का करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके थे। कुख्यातों पर इनाम की घोषणा 2009 में हुई थी। 2015 तक भाइयों पर 15 हजार का इनाम था। कुछ दिनों पहले ही मंडल स्तर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार की गई थी।

एसटीएफ एसपी के रडार पर रहते जनपदीय बदमाश
एसटीएफ एसपी अमित पाठक का दावा है कि जिले के बदमाशों को वह हमेशा से रडार पर रखते हैं। जिले में आईपीएस पाठक 2011-12 में तैनात रहे हैं। एसटीएफ में रहने के दौरान उन्होंने जिले की लूट डकैती की वारदातों में वांछित बावरिया गिरोह के गदला, धम्मी को हरियाणा से गिरफ्तार किया था। अब दुर्दांत इनामी राधेश्याम मौर्या को पकड़ा है।
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दुर्दांत राधेश्याम का आपराधिक इतिहास
 साल          मुकदमा                  थाना/जिला
1989       हत्या का प्रयास            सुल्तानपुर घोष
1989       हत्यायुक्त डकैती           सुल्तानपुर घोष
1989       हत्यायुक्त डकैती           सैनी कौशांबी
1990       हत्या                      असोथर
1990       गैंगस्टर                    सुल्तानपुर घोष
1991       हत्या, अपहरण,बलवा      खागा कोतवाली
1991      हत्या, हत्या का प्रयास      सुल्तानपुर घोष
1996        हत्या                      किशनपुर
1996        अगवा करके हत्या         सुल्तानपुर घोष
1996        हत्यायुक्त डकैती           खखरेरू
1996        अपहरण, धमकी           किशनपुर
1996        हत्यायुक्त डकैती           खागा कोतवाली
1997      पुलिस मुठभेड़ में हत्या        असोथर
1999      अपहरण, हत्या की कोशिश    पैंसा कौशांबी
1999      गुंडा एक्ट                    सुल्तानपुर घोष
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