जिले में पुलिस विभाग और तहसील कर्मियों के भ्रष्टाचार को पब्लिक के वीडियो ने उजागर किया। पहले लेखपाल पर रिश्वत लेने का आरोप वाली वीडियो वायरल हुई और फिर गाड़ी छुड़ाने के लिए पुलिस कर्मियों के संदिग्ध लेनदेन कीे। सोशल मीडिया में दोनों वीडियो चलने लगी तो मामला आलाकमान तक पहुंचा। आनन-फानन में एसपी ने कल्यानपुर थानेदार, एक दरोगा, मुंशी व पुलिस लाइन के सिपाही को निलंबित कर दिया। वहीं डीएम ने भी लेखपाल को निलंबित कर अच्छी छवि दिखाने की कोशिश की। हालांकि इन कार्रवाइयों से दोनों विभागों में हड़कंप है।
मामला नंबर एकः कल्यानपुर थाने में कुछ दिन पहले एक ट्रक बंद था। जिसे छुड़ाने के लिए दो दिन पहले कुछ लोग कोर्ट का रिलीज आर्डर लेकर पहुंचे। आरोप है कि उनसे थाने में तैनात एसआई रामआसरे ने रुपये मांगे। उन्होेंने दो हजार रुपये एसआई को दिए तो उसने तीन हजार की मांग की। एसआई को रकम देने के बाद वे थाने पहुंचे तब मुंशी सुखदेव को एक हजार रुपये देने पड़े। यही नहीं उन्हें पुलिस लाइन में टेक्निकल मुआयने के लिए सिपाही राजेश कुमार शर्मा को भी समझना पड़ा।
पुलिस की रिश्वतखोरी की पूरी वीडियो हर मौके पर बनाई गई। ट्रक छुड़ाने के बाद वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी को मेल पर शिकायत कर वीडियो भेजी गई। जिसे संज्ञान में लेकर एसपी ने सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया। एसओ अंजन कुमार सिंह को पर्यवेक्षण में शिथिल मान थानेदारी से हटाकर बकेवर का एसएसआई बना दिया। एसओव पुलिस कर्मियों की जांच के आदेश सीओ थरियांव पुर्णेंदु को दिए गए हैं।
मामला नंबर दोः थरियांव थाना क्षेत्र के सातो धर्मपुर निवासी रामबाबू क्षेत्रीय लेखपाल चंद्र प्रकाश मौर्या से पीड़ित थे। रामबाबू का आरोप है कि उनकी जमीन के नाप व बंटवारे के विवाद में लेखपाल की लिखापढ़ी बहुत मायने रखती थी। लिहाजा उन्होंने लेखपाल की मांग पूरी कर दी लेकिन उसकी वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया।
डीएम डॉ. वेदपति मिश्र को भी शिकायत की एक प्रति समेत वीडियो दी। वीडियो में लेखपाल और रामबाबू के संवाद व फोटो देख डीएम नाराज हुए। एसडीएम को जांच सौंपी गई। उन्होंने शनिवार को रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। एसडीएम अभिनव रंजन ने बताया कि प्राथमिक जांच में लेखपाल को दोषी पाए जाने पर सस्पेंड किया गया है। उसके खिलाफ जांच बैठाई गई है। जांच के दौरान पीड़ित को पेश होने के लिए भी बुलाया गया है।