फतेहपुर। महज तीस हजार रुपये के चक्कर में नवविवाहिता को जान से मार देने के मामले में अदालत ने सास और जेठानी को दस साल कारावास की सजा सुनाई है। मामले में पति और ससुर पर भी एफआईआर लिखाई गई थी लेकिन दौरान मुकदमा इन दोनों की मृत्यु हो गई थी।
घटना चांदपुर थानाक्षेत्र के सिंकदपुर गांव में दो जुलाई 2009 को घटित हुई थी। मामले के वादी बांदा जनपद के जसपुरा थानाक्षेत्र के अमरा गांव निवासी श्याम मिलन ने अपनी बहन राजाबेटी की शादी चांदपुर थाने के सिकंदरपुर गांव के उमाशंकर से 28 अप्रैल 2008 को की थी। अधिवक्ता के मुताबिक शादी के कुछ महीनों के बाद ही पति उमाशंकर और ससुर रामकिशुन, सास राजेश्वरी व जेठानी रामश्री राजाबेटी पर मायके पक्ष से तीस हजार रुपये
दिलाने का दबाव बना रहे थे। बहन की समस्या सुनकर भाई श्याम मिलन ने ससुरालीजनों को दस हजार रुपये की एफ.डी. और पांच हजार रुपये नगद दिए थेे। शेष पंद्रह हजार रुपये धीरे-धीरे देने का वादा किया था। मगर समय पर मांग पूरी होने से नाराज ससुरालीजनों ने राजाबेटी को जिंदा जलाकर मार डाला था। मामला इसके बाद से अपर
जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवनीत गिरी की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। सहायक शासकीय अधिवक्ता विवेक उमराव ने इस प्रकरण में अदालत के समक्ष गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिन पर विचार करते हुए अदालत ने सास राजेश्वरी और जेठानी रामश्री को कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपियों को सात हजार रुपये का अर्थदंड भी देय होगा।
दहेज हत्या में सास और जेठानी को दस साल की सजा
- पति और ससुर की मुकदमे के दौरान हो गई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो