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गुर्गे से सटोरियों का नेटवर्क नहीं खोज पाई थी पुलिस

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फतेहपुर। शहर पुलिस चाह लेती तो एक पखवारे पहले इसी नेटवर्क के हाथ आए गुर्गे से बड़े रैकेट का खुलासा कर सकती थी। कानपुर एसटीएफ के हाथ आए सट्टेबाजी के मास्टरमाइंड और उसके साथी बेशुमार दौलत होने के नाते शहर के चर्चित परिवारों में एक है। इनके परिवार के लोगों का दुबई से पुराना नाता है। मास्टमाइंड भी दुबई से लौटा था।
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मुख्य आरोपी जितेंद्र शिवहरे उर्फ जीतू के पिता रिटायर्ड फौजी हैं। उसके पास शहर में कई मकान हैं। शहर के चर्चित कारोबारी की पाटर्नरशिप में बेशकीमती प्लाट, गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप है। इसके अलावा भी कई संपत्तियां हैं। शहर में मसर्डीज से आने पर उसकी चकाचौंध को देखकर लोगों की आंखे फटी की फटी रह जाती हैं। करीब पांच

साल पहले दुबई से लौटने के बाद सट्टेबाजी के धंधे को मास्टमाइंड ने जिले में फैलाया था। उसने शहर के कई युवाओं को नेटवर्क से जोड़ा था। उसके साथ विश्वासपात्र रिश्तेदार हिमांशू शिवहरे, रिश्ते में साले थरियांव के करमोन निवासी आशीष शिवहरे, किशनपुर थाने के नरैनी निवासी मोहित शिवहरे भी जुड़े। शांतीनगर निवासी पप्पू मिश्रा का बेटा सुमित भी इनके साथ शामिल हो गया। हालांकि पप्पू मिश्रा ने बताया कि उनका बेटा कार चालक का काम करता है। परिवार के कई लोग दुबई में रहते हैं। बता दें शहर पुलिस ने एक पखवारे पहले विक्की साहू को सट्टेबाजी के आरोप में पकड़ा था। कोतवाल सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उस समय विक्की के सथ हिमांशू, आशीष भी ट्रेस हुए थे। विक्की को जमानत पर गैंग को ट्रेस करने के लिए छोड़ा था। बाद में सभी शहर छोड़कर भाग निकले थे।
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गुर्गे से सटोरियों का नेटवर्क नहीं खोज पाई थी पुलिस
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अमर उजाला ब्यूरो
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