बहुआ। करीब नौ दिन पुलिस हिरासत में रहे लड़की भगाने के आरोपी के पिता की संदिग्ध हालात में मंगलवार देर शाम मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस और लड़की पक्ष के लोगों पर पीटने, डराने, धमकाने का आरोप लगाया है। परिजनों ने पिटाई से हालत गंभीर होने के कारण मौत होने का आरोप लगाया है। जबकि पुलिस बेटेे की करतूत से आत्मग्लानि में वृद्ध की आत्महत्या करने की बात कह रही है।
ललौली थाना क्षेत्र के महना गांव निवासी जगराम रैदास (50) का बेटा संजय उर्फ विमलेश गुजरात के सूरत में प्राइवेट नौकरी करता है। जगराम साइकिल रिपेयरिंग की बंधवा तिराहे पर दुकान चलाते थे। दूसरे बेटे प्रदीप कुमार रैदास ने बताया कि उसके भाई संजय की तलाश में कानपुर नौबस्ता थाने के बर्रा चौकी की पुलिस पांच अगस्त को
आई थी। दुकान बंद कराकर पुलिस पिता को साथ ले गई थी। मामले की जानकारी की गई तो पता चला कि संजय पर नौबस्ता क्षेत्र की एक बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाली लड़की को एक माह पहले अपहरण करने का आरोप है। पुलिस संजय को थाने लेकर आने की बात कहकर चली गई थी। तमाम प्रयास के बाद संजय से संपर्क नहीं हो सका। बर्रा चौकी से प्रधान के पास 14 अगस्त को फोन पहुंचा। पुलिस ने पिता को लिवा ले जाने की बात कही। चाचा फूल कुमार और मां शांति देवी पिता को घर लेकर आए थे। पुलिस ने एक हफ्ते में संजय को हाजिर करने की चेतावनी दी थी।
परिजनों ने बताया कि घर आने के बाद जगराम ने आपबीती बताई थी। पुलिस व लड़की पक्ष ने बेरहमी से पीटना बताया था। वह ठीक से चल नहीं पाते थे। दर्द से कराहते रहते थे। मंगलवार शाम गांव तालाब किनारे नित्यक्रिया के लिए गए थे। वहीं गिरने से बेहोश हो गए। ग्रामीणों की सूचना पर घर लेकर आए। घर से अस्पताल लेकर जा रहे थे। तभी उनकी मौत हो गई। एसओ राजेश मौर्या ने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तहरीर पर कार्रवाई की जाएगी। जगराम सीधे साधे व्यक्ति थे। बेटे की घटना से आत्मग्लानि में आत्महत्या करने की संभावना हो सकती है।
वृद्ध की संदिग्ध हालात में मौत
- परिजनों ने पुलिस व दूसरे पक्ष पर पिटाई और धमकाने का लगाया आरोप, पुलिस बता रही आत्महत्या
- मृतक के बेेटे पर कानपुर से बीए की छात्रा के अपहरण का है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो संख्या एवं परिचय
11- फाइल फोटो
12- परिजनों से पूछताछ करती पुलिस
लापता युवती का शव मिला
पुलिस ने दो दिन पहले घायल हालत में जिला अस्पताल में कराया था भर्ती
परिजनों के मुताबिक, मां से झगड़ कर सात दिन पहले घर से निकली थी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। हफ्ते भर से लापता युवती को खोजते हुए परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। यहां मुर्दाघर में उसका शव मिला। दो दिन पहले घायल हालत में युवती को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह कैसे घायल हुई, लापता रहने के दौरान कहां थी, फिलहाल यह सवार अनसुलझे ही हैं।
हथगाम थाना क्षेत्र के घूरी गांव किनारे रोड पर ग्रामीणों ने सोमवार भोर एक 20 वर्षीय युवती के घायल हालत में पड़े होने की खबर दी थी। हथगाम थाने का फोर्स पहुंचा था। पुलिस व प्रधान घनश्याम कुमार ने युवती को करीब दस बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। युवती के शरीर पर कई जगह जख्म थे। वह कुछ अपने बारे में बता नहीं सकी थी। इलाज के दौरान उसकी मंगलवार रात सांसें थम गईं। उसकी तलाश में हुसैनगंज थाना क्षेत्र के अहेवा नयानी गांव निवासी स्वर्गीय रामलखन सिंह का बेटा सुनील बुधवार को जिला अस्पताल पहुंचा। अस्पताल में युवती की पहचान बहन अल्पना चौहान (20) के रूप में की। सुनील ने बताया कि वह गुजरात में रहता है। मां चंदा देवी से झगड़ने के बाद 15 अगस्त की दोपहर अल्पना घर छोड़कर चली गई थी। मां की सूचना पर खोजबीन चालू की गई। उसके बाद गुजरात से घर पहुंचा। हुसैनगंज थाने में रविवार को गुमशुदगी दर्ज कराई। आसपास के इलाके में पूछताछ की। उसे मंगलवार शाम अखबार के माध्यम से एक युवती घायल हालत में अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी।
घटना से मां चंदा देवी बदहवास हो गई। सुनील ने बताया कि वह चार भाई सुशील, सुदेश, सुधेश हैं। अल्पना से बड़ी शादीशुदा दो बहनें विमला, कल्पना हैं। चारों भाई सूरत में प्राइवेट फैक्ट्री में नौकरी करते हैं। सुनील का कहना है कि 15 अगस्त से किसी बात को लेकर झगड़े के बाद घर से निकली थी। वह बीस अगस्त तक कहां किन हालातों में रही है। उसने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने खोजने का प्रयास नहीं किया। पुलिस प्रयास करती तो शायद बहन जिंदा मिलती। हथगाम थानेदार विजय राय ने बताया कि रविवार देर रात किसी वाहन की टक्कर से घायल हुई। वह सुबह घायल हालत में मिली थी। मामले की जांच की जाएगी।
इनसेट
युवती के कपड़े बदले मिले
घर से युवती 15 अगस्त को दूसरे कपड़े पहनकर निकली थी। जब वह घायल हालत में मिली तो कपड़े दूसरे थे। मां चंदा देवी ने बताया कि उसकी बेटी सलवार सूट पहने थी। युवती बैगनी रंग की टीशर्ट व काले रंग की पैयजामी पहने मिली। उसके पेट, दाहिने हाथ, चेहरे पर चोटों के निशान दिखे हैं।
इनसेट
नाक की कील से परिजनों ने पहचाना
अल्पना की मौत के करीब 12 घंटे तक शव मुर्दाघर में रखा रहा है। इस दौराना शारीरिक आकृति में बदलाव आ गए थे। कपड़े भी उसके नहीं थे। जिससे मां चंदा देवी ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया था। हालांकि भाई सुनील पहचाने का दावा कर रहा था। नाक की कील को मां ने गौर से देखा। उसने बेटी होने की शिनाख्त की। फफक कर मां रो पड़ी। उसने बताया कि अभी जल्द ही कील उसने खरीद कर बेटी को पहनाई थी।