फतेहपुर। शादी के बाद पहली बार बेटी को घर लाने की खुशियां पलक झपकते हुए हादसे के दौरान मातम में तब्दील हो गई। घटनास्थल और अस्पताल में चीत्कारें गूंजती रहीं। रमेश पर इन तीन बेटियों के साथ चार और बेटियों की भी जिम्मेदारी थी। हादसे की खबर सुनकर गोपीपुर गांव के सैकड़ों लोग जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में एक साथ पड़े पांच शवों को देखकर सबका दिल पसीज गया।
हादसे में दुल्हन विमला के चाचा रमेश और उनकी बेटियों आरती, प्रिया, सोनम की मौत हुई। परिजनों ने बताया कि रमेश दिल्ली में पेटिंग ठेकेदारी करते थे। रमेश की पत्नी लक्ष्मी देवी गांव में सात बेटियों के साथ रहती थीं। रमेश बड़ी बेटी आरती की शादी के लिए रिश्ते की खोजबीन में जुटे थे। उनकी कमाई से परिवार का भरण-पोषण होता रहा है। भतीजी विमला की शादी में दिल्ली से लौटकर आए थे। रमेश के कोई बेटा नहीं है। दूसरी ओर विमला के पिता राकेश पुणे में प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड हैं। हादसे की सूचना पर रमेश की पत्नी लक्ष्मी, राकेश की पत्नी श्रीपतिया अस्पताल पहुंचीं। दोनों बदहवास होकर गिर पड़ीं। दूसरे परिजनों ने उन्हें संभाला। जिला अस्पताल में परिजनों की चीत्कार व घायलों की चीख से अफरातफरी का माहौल रहा। शहर कोतवाल सत्येंद्र सिंह समेत कई चौकियों का फोर्स जिला अस्पताल पहुंचा। अस्पताल में घायलों को भर्ती कराने और रेफर कराकर एंबुलेंस से कानपुर भेजा।
बोलेरो के इस हादसे में मरने वालों की संख्या जहां पांच रही। इससे माना जा रहा है कि बोलेरो की स्पीड काफी अधिक थी। परिवार के ही कुछ लोग चालक पर नशे में होने का आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि उसे रास्ते में तेज चलाने पर टोका भी गया था। हादसे के बाद वह भाग निकला। इधर, परिजनों व घायलों को काफी समय तक यह नहीं बताया गया कि हादसे में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। पर, यह बात ज्यादा देर छिपी नहीं रह सकी। जैसे ही मृतकों के चेहरे परिजनों ने खोले गश खाकर गिर गए। कइयों के चेहरे हादसे में इस तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे कि पहचान में नहीं आ रहे थे।
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