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फारचूनर से हो रही थरियांव क्षेत्र में तस्करी

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हसवा। थरियांव थाना क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार धड़ल्ले से फलफूल रहा है। लग्जरी वाहनों से गैर प्रांतों की शराब की तस्करी हो रही है। क्षेत्रीय शराब माफियायों का तस्करी में हाथ माना जा रहा है। तस्कर पहले भी कई बार पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं।
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कुछ दिन पहले एसटीएफ कार्रवाई में थरियांव हाईवे से एक ट्रक अवैध शराब पकड़ी गई थी। गैर प्रांत से लाई जाने वाली शराब की बोतलों के रैपर बदल कर यूपी सप्लाई का रूप दिया जा रहा है। बड़ी मात्रा में यह शराब ठेकों में खपाई जा रही है। थाना क्षेत्र के दो सगे भाइयों का नेटवर्क ने एक बार फिल से इस गोरखधंधे को रफ्तार पकड़ा दी है। शराब सप्लाई के लिये लग्जरी वाहनों के इस्तेमाल हो रहा है। सफेद रंग की फारचूनर से शराब ठेकों में

सप्लाई आती है। इसमें माफियायों के गुर्गे मौजूद रहते हैं। सूत्रों की मानें तो इलाकाई पुलिस के कुछ चर्चित सिपाहियों की संलिप्तता है। माफियायों और पुलिस गठजोड़ से राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है। क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले दो भाइयों का नेटवर्क पूरे जनपद में फिर से सुर्खियों में आ गया है। अभी कुछ दिन पहले इन
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भाइयों को बांदा बार्डर पर पकड़ा गया था। लेकिन कुछ दिन शांत रहने पर फिर शराब का सिंडीकेट फिर सक्रिय हो गया है। थानाध्यक्ष संतोष शर्मा ने बताया कि नया थाना मिला है। पुलिस इस दिशा में काम कर रही है। जल्द ही परिणाम दिखेगा। बिलंदा कस्बे में किराये की एक दुकान मादक पदार्थ बेचने का अड्डा बना है । यहां पर दो लोग दो साल से मादक पदार्थ बेच रहे हैं। इस दुकान में प्रति सप्ताह एक लग्जरी वाहन चालक आकर मादक पदार्थ देता है और पुराना हिसाब किताब लेता है। आस पास के लोगों ने बताया कि शाम होते ही बिक्री तेज हो जाती है। लोगों की मानें तो कई बार स्थानीय पुलिस बगल से निकल जाती है, लेकिन तस्कर उसे नहीं दिखते।
स्कूल के बगल चल रहा ठेका
बिलंदा कस्बे में एक स्कूल से महज दस कदम की दूरी पर शराब का ठेका संचालित है। यही नहीं शराब के ठेके से कुछ दूरी पर मंदिर भी है। पुलिसिया रहमोकरम पर ठेका धड़ल्ले से चल रहा है। स्कूल के पास शराब का ठेका होने से लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि ठेका स्कूल के पास नहीं होना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक निष्क्रियता से सब कुछ पुराने ढर्रे पर चल रहा है।
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