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एक थानेदार पर भी सीबीआई की टिकीं निगाहें

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहपुर। अवैध खनन की छानबीन में जुटी सीबीआई का नए-नए मामले से साबका हो रहा है। बिंदकी तहसील क्षेत्र के बारा और कोरौली घाट में पांच साल पहले हुए मौरंग खनन के मामले में एक थानेदार का नाम सामने आया है। जिस पर रिश्वत के एवज में खनन माफिया का साथ देने का आरोप लगाया गया। सीबीआई का ऐसे में उक्त थानेदार तक पहुंचना तय है।

सपा शासन काल में हुए अवैध खनन की तह तक पहुंचने के लिए नौ जनवरी से जिले में मौजूद सीबीआई टीम के समक्ष बुधवार को भी कई लोग तलब हुए। इनमें कुछ शिकायतकर्ता भी थे। इन्हीं में से एक शिव बहादुर भी थे। उन्होंने टीम को बताया कि वर्ष 2012 व 13 में बारा और कोरौली घाट में तब जाफरगंज के थानेदार अंजनि राय थे। शेयर मिलने की वजह से थानेदार आंख मूंद कर यमुना की कोख खाली करवा रहे थे। खनन माफिया ने कोरौला घाट से मौरंग निकालने के लिए डेढ़ किलोमीटर का रास्ता बनवाया था। यह काम 15 दिन जेसीबी चलवा कर किया गया था।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि इसकी जानकारी पर उन्होंने मौके पर पहुंच कर कवरेज किया। लौट रहे थे तभी थानेदार ने हमराही आशुतोष के साथ उन्हें बीच रास्ते मेें रोक लिया था। आशुतोष ने कनपटी में रिवाल्वर लगाकर कैमरे में ली गई फोटो डिलीट करने की धमकी दी। मैने ऐसा नहीं किया तो फंसाने की बात करते हुए चले गए। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से मुझे झूठे मामले में फंसा दिया गया। सीबीआई ने पूरी बात सुनने के बाद सौंपे गए साक्ष्य रखकर यह साफ कर दिया है कि वह आरोपी थानेदार के पास भी पहुंचेगी।

एक महीने का वक्त लग सकता है खुलासे में
फतेहपुर। सीबीआई टीम ने एक सप्ताह से छानबीन में जुटी है। अभी तक की तफ्तीश में जुटाए गए साक्ष्यों पर डीएसपी केपी शर्मा की टीम लगातार काम कर रही है। साक्ष्यों का जो ढेर लग चुका है। उससे पूरी रिपोर्ट को ओके करने में करीब एक महीने का वक्त लगना तय है।
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कई के बंद हैं फोन
फतेहपुर। अवैध खनन मामले पर सीबीआई के डेरा डालने के बाद इस धंधे में लिप्त लोगों को सांप सूंघ गया है। कई ने अपने फोन बंद कर लिए हैं। दहशत का माहौल इस कदर है कि परिवारवालों के भी सेलफोन नाट रिचेबल बता रहे हैं। पीडब्लूडी के सर्किट हाउस में कौन पहुंच रहा है और कौन नहीं। इसे जानने को गुर्गे लगाए गए हैं।
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