फतेहपुर। बेसिक शिक्षा विभाग ने मां से शपथपत्र लेकर बेटे को बहन का मृतक आश्रित बनाकर लिपिक की नौकरी दे दी। बहन की सर्विस बुक में नामनी के स्थान पर भाई का नाम अंकित नहीं है। मुख्यमंत्री से शिकायत पर बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की है। बीएसए ने बीईओ मुख्यालय राजेश कटियार को जांच दी है।
हथगाम ब्लाक के कनकपुर निवासी पियूष को मार्च 2019 में मृतक आश्रित कोटे पर बीईओ मुख्यालय के अधीन कनिष्ठ लिपिक की नौकरी दी गई थी। पियूष के पिता वित्तपोषित (एडेड) इंटर कॉलेज में शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हैं। पियूष की अविवाहित बहन की मौत के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह खेल किया। खास बात यह है कि सेवारत बहन और भाई पियूष दोनों पिता के आश्रित हैं, लेकिन बहन की मौत के बाद बिना किसी आधार के तत्कालीन बीएसए ने मां से शपथ पत्र लेकर भाई पियूष को बहन का मृतक आश्रित बना दिया।
जांच अधिकारी बीईओ मुख्यालय राजेश कटियार का कहना है कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट अगले सप्ताह बीएसए को सौंप दी जाएगी। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि तहसील से अधिकृत वरासत प्रमाण पत्र ही साक्ष्य माना जाता है। सर्विस बुक में संबंधित व्यक्ति का नाम-नामिनी कॉलम में अंकित है। ऐसे व्यक्ति को ही किसी मृतक कर्मचारी का आश्रित माना जा सकता है। परिवार के किसी सदस्य का दिया गया शपथपत्र मृतक आश्रित कोटे से नौकरी देने का प्रमाण पत्र नहीं है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।