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खदान संचालकों पर साढ़े नौ करोड़ हड़पने की एफआईआर.

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फतेहपुर। सलेमपुर खदान के पट्टेधारक दंपती और उनके तीन साथी संचालकों पर साढ़े नौ करोड़ रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। लखनऊ गोमती नगर विजय खंड निवासी ठेकेदार जितेंद्र पांडेय की तहरीर पर कार्रवाई की गई है। जितेंद्र ने खनन अधिकारी पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने उन्हें एफआईआर में नामजद नहीं किया है।
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जितेंद्र ने शिकायत में बताया कि 2020 में खागा तहसील में मधुबाला ओझा और उनके पति मनीष ओझा के साथ मौरंग खदान में साझीदारी की थी। उसने मधुबाला को 1.50 करोड़ रुपये आरटीजीएस किए थे। उसे खदान में 15 प्रतिशत का भागीदारी बनाया गया था। साझेदारी लखनऊ इंदिरा नगर निवासी संजय कुमार ने अपने घर में कराई थी।
खदान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे उनसे साढ़े सात करोड़ और लिए गए। रुपये न देने पर विभूतिखंड थाना गोमती नगर में शिकायत की थी। पुलिस के सामने मनीष और मधुबाला ने शपथ पत्र देकर रुपये देने की बात स्वीकार की थी। तीन करोड़ 72 लाख की चेक दी। मौरंग डंप बेचकर बाकी रकम देने की बात कही थी। इसके बाद 10 लाख रुपये ही दिए। इस बीच मनीष ने प्रेमचंद्र केसरवानी जिला कौशांबी के साथ घाट संचालन का एग्रीमेंट किया।
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फिर उससे 50 लाख रुपये मांगे। उसने शपथ पत्र में लिखापढ़ी के बाद प्रेमचंद्र केसरवानी के खाते में 50 लाख रुपये भेज दिए। घाट का संचालन कर करोड़ों की मौरंग 30 जून 2022 तक बेची गई। इसके बाद भी उसके रुपये नहीं लौटाए। सीओ संजय सिंह ने बताया कि एसपी के आदेश पर मधुबाला और उनके पति मनीष ओझा निवासी श्याम कालोनी भगौतीगंज रेलवे स्टेशन जिला बलरामपुर, संजय श्रीवास्तव निवासी इंदिरा नगर लखनऊ, महेश तिवारी निवासी कबरई महोबा, हरिवीर सिंह काके निवासी पंजाब पर रकम हड़पने, फ्राड, कूटरचना की एफआईआर दर्ज की गई। जांच में बाकी नाम प्रकाश में लाए जाएंगे।
जितेंद्र का आरोप है कि खदान का पट्टा मधुबाला के नाम है। मनीष ओझा द्वारा पत्नी मधुबाला के बैंक खाते से हस्ताक्षर किए जाते हैं। मनीष ने पत्नी के नाम पर कई मौरंग खनन के पट्टे कराए हैं। नुकसान बताकर पार्टनरों और सरकारी धन हड़प लेते हैं। इसके बाद नई फर्म बनाकर फिर दूसरे पट्टे का आवंटन कराते हैं। इसमें खनन विभाग की भी मिलीभगत होती है।
महेश तिवारी, हरवीर सिंह उर्फ काके कूटरचित दस्तावेज बनाते हैं। पुरानी रायल्टी से भंडारित मौरंग बेचकर करोड़ों के राजस्व की चोरी करते हैं। 2021 में रायल्टी भंडारण लाइसेंस निर्गत होने से पहले की प्रयोग की गई है। भंडारण स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में किया गया है।
मनीष ओझा और उनकी पत्नी मधुबाला पर पहले भी मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। पुलिस द्वारा चार्जशीट भी लगाई गई है। सदर कोतवाली में मनीष ओझा और उनके पाटर्नर महेश तिवारी के खिलाफ लखनऊ के ही संजय मिश्रा ने ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद दूसरा मुकदमा खदान में सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट का दर्ज हो चुका है।
दोनों पक्षों का आपस में 2020 में एग्रीमेंट हुआ था। कुछ दिन पहले जितेंद्र मामला लेकर आए थे। विभाग या उनका कोई लेनादेना नहीं है। पुलिस की जांच में सारा मामला स्पष्ट हो जाएगा। उन पर लगाए आरोप बेबुनियाद हैं। - राजेश कुमार- खनन अधिकारी
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