ललौली कोर्राकनक मार्ग में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
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फतेहपुर। यमुना का घटता जलस्तर अब खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। गांवों व खेतों से पानी उतर गया है। गांवों में कीचड़ और गंदगी से बदबू फैली हुई है। ग्रामीण उल्टी, दस्त, जुकाम, बुखार और खुजली की चपेट में आ रहे हैं। बांदा-कानपुर स्टेेट हाईवे पर छठवें दिन वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है।
यमुना नदी का जलस्तर 102.80 मीटर से घटकर 100.13 मीटर पर पहुंच गया है। इससे बाढ़ की स्थित खत्म हो गई है। हफ्तेभर से घरों में पानी भरे होने के कारण सीलन बनी हुई है। कीचड़ साफ करने के लिए सफाई कर्मियों को लगाया गया है। ललौली क्षेत्र के 10 गांवों में 1132 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य टीम कैंप लगाकर गांवों में उपचार करने में लगी है। पशुपालन विभाग भी कैंप लगाकर बीमार मवेशियों का इलाज कर रहा है। अभी तक बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं आई है। कहीं पर लाइन कटी है तो कहीं पर खंभा झुक गया है। बहुआ प्रतिनिधि के मुताबिक बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे खुल गया है। ललौली कस्बे से सफर करने वाले यात्रियों का आवागमन भी शुरू हो गया है। ललौली-उरौली, दसौली मार्ग, अढ़ावल मार्ग से बाढ़ का पानी खत्म हो गया है।
बहुआ। बाढ़ से सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गईं हैं। अरहर, तिल, ज्वार, बाजारा, मूंग, उर्द, धान और हरे चारा की फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों को सालभर परिवार का पेट भरने व खर्च की चिंता सताने लगी है। (संवाद)